उत्तरप्रदेश

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी परिवारों ने लखनऊ से भरी हुंकार

आज़ादी के वीर बांकुरे मतवाले सेनानियों के परिजन सेनानी सदन लखनऊ में जुटे

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राव जुबैर पुंडीर) लखनऊ। आज रिवर बैंक कालोनी स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सेवा सदन में उत्तर प्रदेश सेनानी परिवारों के पदाधिकारियों की प्रान्तीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों के पदाधिकारी सम्मिलित हुए। इस बैठक में 98 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. प्रहलाद प्रसाद प्रजापति मुख्य अतिथि के रूप में तथा उत्तराखण्ड से आये स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत भूषण विद्यालंकार विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे। बैठक की अध्यक्षता अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन राज्य इकाई की अध्यक्ष श्रीमती शशि शर्मा ने की। रमेश कुमार मिश्र के संचालन में संपन्न हुई संगोष्ठी के मुख्य वक्ता हरिद्वार से आए राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी थे। बैठक में प्रत्येक जिले से आए हुए पदाधिकारियों से सौंपे गए दायित्वों की प्रगति की जानकारी भी ली गई।

हरिद्वार से आए हुए स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय महासचिव श्री जितेन्द्र रघुवंशी ने आए हुए सेनानी परिवारों को अपने आत्म गौरव को पहचानने की प्रेरणा देते हुए कहा कि हमारी लड़ाई केवल स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान तथा उनके उत्तराधिकारियों के अस्तित्व की रक्षा की है। बहुत दु:ख होता है जब हमारे सेनानी संगठन विभिन्न रूपों में सरकारों को मांग-पत्र दे देकर अपने आपको भिखारी बना बैठते हैं। हमारा दायित्व है कि हम अपने गौरव को पहचानें। हम भिखारी नहीं है, हमारे पूर्वजों ने देश को आजाद करके सत्ता राजनेताओं को सौंपी है। हम दाता हैं, सरकार का यह दायित्व था कि आजादी के दीवाने उन सेनानियों के उत्तराधिकारी परिवारों का संरक्षण करे, किंतु दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता सेनानी/शहीद परिवारों की ओर सरकार का ध्यान ही नहीं जा रहा है। सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों को ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था, जिनके पास आवास नहीं थे उन्हें आवास दिया, जिनके पास भूमि नहीं थी, उन्हें भूमि प्रदान की, पेट्रोल पंप दिए तथा सम्मान पेंशन प्रदान की। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के निधन के बाद न तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का ताम्रपत्र वापस लिया जाता है, न भूमि ली जाती है, न आवास और न ही पेट्रोल पंप जैसी सुविधाएं वापस ली जाती हैं। तो उन्हें दी जाने वाली सम्मान पेंशन क्यों बंद कर दी जाती है? उन्होंने कहा कि यह सम्मान पेंशन भी उनके उत्तराधिकारियों को सौंपी जानी चाहिए।

रघुवंशी ने पदाधिकारियों से कहा कि अपने-अपने जिलों के स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को संगठित करें और आवश्यकता पड़ने पर गांधीजी के असहयोग आंदोलन की भांति प्रांत की राजधानी लखनऊ या देश की राजधानी दिल्ली में अपनी जनशक्ति के सहारे सरकार को उनके दायित्वों का बोध कराने के लिए एकजुट हों। वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. प्रहलाद प्रसाद प्रजापति एवं भारत भूषण विद्यालंकार ने भी बैठक में शामिल प्रतिनिधियों को संगठित होकर आन्दोलन करने की प्रेरणा दी।

बैठक को प्रत्येक मण्डल के वरिष्ठ पदाधिकारियों सर्वश्री आदित्य भान सिंह, प्रमोद श्रीवास्तव, इशरत उल्ला खान, मुन्ना लाल कश्यप, अशोक दीक्षित, हरिराम गुप्ता, सूर्य प्रकाश पाण्डेय, विमलेश पाण्डेय, माधवराज सिंह, राजेश सिंह, सुरेश चंद्र बबेले, गिरिजा शंकर राय, अभिनव शुक्ल, सतेन्द्र सिन्हा ने भी सम्बोधित किया। सभाध्यक्ष शशि शर्मा ने प्रदेश के कोने-कोने से पधारे प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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