देहरादून

एनआरआई महिला की जमीन के कूटरचित दस्तावेज बनाकर मुज़फ्फरनगर के एक व्यक्ति को बेचने वाले मुख्य आरोपी समेत 3 गिरफ्तार

राजेश कुमार देहरादून प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश कुमार) देहरादून। राजधानी देहरादून में सामने आये अब तक के सबसे बड़े फर्जीवाड़ों में से एक जमीनी फर्जीवाडे में गठित एसआईटी टीम द्वारा मामले में एक के बाद एक अभियुक्तो की गिरफ्तारी के साथ ही राजधानी के अन्य क्षेत्रों में भी हुए फर्जीवाड़ों का खुलासा किया जा रहा है। जिसमे एसआईटी द्वारा शुक्रवार को गिरफ्तार किये गए अभियुक्त फॉरेंसिक एक्सपर्ट अजय पालीवाल ने राजपुर अंतर्गत मधुबन होटल के सामने स्थित एक एनआरआई महिला की दो से ढाई बीघा जमीन के कूटरचित दस्तावेज तैयार कर मुज़फ्फरनगर निवासी एक व्यक्ति को बेचने का खुलासा किया था,जिसमे एसआईटी द्वारा आज मुख्य अभियुक्त समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस कप्तान अजय सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि रजिस्ट्रार कार्यालय में रखे जमीनी कागजातों में छेड़छाड़ व कूटरचना के मामले में दर्ज 9 मुकदमो में एसआईटी द्वारा अब तक कुल 13 लोगो को गिरफ्तार किया है। जिसमे शुक्रवार को गिरफ्तार फॉरेंसिक एक्सपर्ट अभियुक्त अजय पालीवाल ने पूछताछ में बताया कि उसके द्वारा कमल बिरमानी, के०पी सिंह आदि के साथ मिलकर कई जमींनो के फर्जी विलेख पत्रों में फर्जी राइटिंग एवं हस्ताक्षर बनाये थे, जिसका प्रयोग कर अभियुक्तगणों ने करोड़ो रूपये कमाए थे। उसने बताया था कि के०पी सिंह के कहने पर उसके द्वारा इंग्लैंड में रहने वाली एक महिला रक्षा सिन्हा की राजपुर रोड स्थित एक भूमि के कूटरचित विलेख पत्र रामरतन शर्मा, निवासी मुज़फ्फरनगर के नाम से बनाकर उनके द्वारा देहरादून निवासी ओमवीर व मुजफ्फरनगर निवासी सतीश व संजय को को दिये गए थे। अभियुक्त के बताए अनुसार एसआईटी द्वारा जांच करने पर ज्ञात हुआ कि राजपुर रोड मधुबन होटल के सामने एन०आर०आई महिला रक्षा सिन्हा की करीब दो-ढाई बीघा भूमि है, जिसके कूटरचित दस्तावेजो को रजिस्ट्रार कार्यालय में सम्बन्धित रजिस्टर में लगा देने के सम्बन्ध में सहायक महानिरीक्षक निबन्धन द्वारा कोतवाली नगर मेंमुकदमा दर्ज करवाया है। अभियुक्त अजय पालीवाल के बयानों के आधार पर एसआईटी द्वारा संजय कुमार शर्मा (48) पुत्र रामरतन शर्मा निवासी पंचेड़ा रोड निकट गोल्डन पब्लिक स्कूल थाना नई मंडी, मुज्जफरनगर उत्तर प्रदेश, ओमवीर तोमर(67) पुत्र स्व० ओमप्रकाश निवासी B 220 सेक्टर 2, डिफेंस कॉलोनी देहरादून, सतीश कुमार (60) पुत्र स्व० फूल सिंह निवासी 1728 जनकपुरी रुड़की रोड़ थाना सिविल लाइन, मुज्जफरनगर, उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार किया गया। पुलिस कप्तान ने बताया कि पकडे गए अभियुक्तो में से ओमवीर का जमीनी फर्जीवाड़ों से पुराने लिंक सामने आए है व कई विवादित भूमियो में उसकी संलिप्तता उजागर हुई है। उन्होंने बताया कि के०पी शर्मा और कमल विरमानी की ही तरह ओमवीर की भी राजधानी में लंबे समय से खाली पड़ी, व विवादित जमीनों पर नज़र रहती थी,जिसको उसके द्वारा फर्जी तरीके से हासिल किया जाता था। अभियुक्त को
राजपुर रोड मधुबन के पास स्थित दो-ढाई बीघा जमीन के बारे में पता चला,जिसकी उसके द्वारा जानकारी जुटाई गई तो ज्ञात हुआ कि उक्त जमीन इंग्लैंड में रहने वाली एनआरआई रक्षा सिन्हा की है, जो काफी वर्षों से देहरादून नहीं आई है। उसने पता किया कि रक्षा सिन्हा के पिता पी०सी निश्चल देहरादून में ही रहते थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। चूंकि ओमवीर की के०पी सिंह से भी जान पहचान थी तो उसके द्वारा के०पी.सिंह को उस जमीन के बारे में बताया। के०पी ने ओमवीर कल उक्त जमीन को उत्तराखण्ड के बाहर किसी बुजुर्ग व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड विलेख पत्र के माध्यम से करा देने का आश्वासन दिया,जिसके लिए बुजुर्ग का प्रबंध करनी की जिम्मेदारी ओमवीर को दी।
ओमवीर द्वारा अपने परिचित अभियुक्त सतीश के माध्यम से उसके मुज़फ्फरनगर निवासी दोस्त संजय के पिता रामरतन शर्मा के नाम पर उक्त भूमि के फर्जी विलेख पत्र के0पी सिह के माध्यम से तैयार करवाये जिसमे अभियुक्तो नेरी उक्त जमीन सन् 1979 में मृतक पी0सी निश्चल द्वारा राम रतन के नाम विक्रय करना दिखलाया। जिसके पश्चात रजिस्ट्रार कार्यालय में बाईन्डर का काम करने वाले सोनू से उक्तकूटरचित कागजात रजिस्ट्रार कार्यालय में सम्बन्धित रजिस्टरों पर लगवा दिए गए। ओमवीर द्वारा उक्त जमीन को बेचने के इरादे से बाजार में उस जमीन को बेचने की कोशिश की गई,जिसपर देहरादून निवासी मनोज तालीयान को उक्त प्रॉपर्टी के सम्बन्ध में जानकारी होने पर वह राम रतन शर्मा व उसके बेटे संजय शर्मा से मिलने मुजफ्फरनगर गए व उक्त जमीन का सौदा ग्रीन अर्थ सोलर पावर लिमिटेड से 3 करोड़ 10 लाख में सौदा तय करव दिया और एग्रीमेंट के मुताबिक 1 करोड़ 90 लाख रूपये संजय सिंह को दिये, जिसमें से पूर्व में तय अनुसार संजय सिंह को 66 लाख और ओमवीर को 96 लाख व सतीश को 38 लाख के करीब की धनराशि मिली। उक्त भूमि की सम्बन्धित कम्पनी को रजिस्ट्री की जानी थी परन्तु सम्बन्धित कम्पनी द्वारा उक्त भूमि के पूर्व में चले आ रहे विवाद के हल होने के बाद ही रजिस्ट्री कराने तथा शेष रकम रजिस्ट्री के बाद देने की बात कही गयी थी। किन्तु उससे पूर्व ही राजधानी में जमीनी फर्जीवाडो का खुलासा हो गया।

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