देहरादून

आस्था, परंपरा और तैयारियों के संग शुरू हुई बद्री विशाल के दर्शन की तिथि घोषित

राजेश पसरीचा देहरादून प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश पसरीचा) ऋषिकेश। उत्तराखंड की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र माने जाने वाले श्री बद्रीनाथ धाम को लेकर आज आस्था और परंपरा का संगम देखने को मिला। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर टिहरी स्थित नरेंद्र नगर राजदरबार में शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित कर दी गई। इस बार बद्रीधाम के कपाट 23 अप्रैल गुरुवार प्रातः 6:15  पर खुलेंगे। इसके साथ ही देश-विदेश में फैले श्रद्धालुओं के लिए बद्री विशाल के दर्शन की उलटी गिनती शुरू हो गई है।

राजदरबार में आयोजित पारंपरिक धार्मिक समारोह के दौरान महाराजा मनु जयेंद्र शाह ने स्वयं कपाट खुलने की तिथि की घोषणा की। इस अवसर पर राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने पंचांग गणना, ग्रह-नक्षत्रों और शुभ योगों के आधार पर तिथि निर्धारित की। वैदिक मंत्रोच्चार, पंचांग पाठ और विशेष अनुष्ठानों के बीच जैसे ही तिथि की घोषणा हुई, पूरा राजदरबार “जय बद्री विशाल” के जयघोष से गूंज उठा।
इस ऐलान को सिर्फ एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि चारधाम यात्रा के औपचारिक शुभारंभ की भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति, तीर्थ पुरोहित, डिमरी समाज के प्रतिनिधि और अनेक धर्माचार्य इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।

इधर, चारधाम यात्रा को लेकर शासन-प्रशासन की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। 19 अप्रैल से प्रस्तावित यात्रा सीजन को लेकर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पिछले वर्ष के अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार यात्रा को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाने का दावा किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा ने न सिर्फ धार्मिक वातावरण को उत्साह से भर दिया है, बल्कि उत्तराखंड में एक बार फिर आस्था, पर्यटन और परंपरा के महायात्रा पर्व की आहट सुना दी है।

Related Articles

Back to top button