देहरादून

डीजीपी की दो टूक: लापरवाही, भ्रष्टाचार और लैंड फ्रॉड पर सख़्त प्रहार

हाई-लेवल समीक्षा बैठक में कई चौकी प्रभारी निलम्बित, 7 दिन में रिपोर्ट तलब

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश पसरीचा) देहरादून। उत्तराखण्ड पुलिस में अनुशासन पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस मुख्यालय, देहरादून स्थित सरदार पटेल भवन में आयोजित उच्च स्तरीय अपराध एवं कानून व्यवस्था समीक्षा बैठक में डीजीपी ने साफ शब्दों में कहा कि गंभीर अपराधों में लापरवाही, सिविल मामलों में दखल और भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में गढ़वाल एवं कुमाऊँ रेंज के अधिकारी, समस्त जनपदों के पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ सहित पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान अपराध नियंत्रण, विवेचनाओं की गुणवत्ता और जनशिकायतों के निस्तारण पर विस्तार से चर्चा हुई।

लापरवाही पर त्वरित निलम्बन
ऋषिकेश में महिला की गोली मारकर हत्या के मामले में गंभीर लापरवाही बरतने पर एम्स चौकी प्रभारी SI साहिल वशिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया। वहीं देहरादून कोतवाली नगर क्षेत्र में युवती के जघन्य हत्याकांड में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर खुड़बुड़ा चौकी प्रभारी SI प्रद्युम्न नेगी को भी निलम्बित कर दिया गया। दोनों मामलों की जांच एसपी क्राइम श्रीमती विशाखा अशोक भदाणे को सौंपी गई है। अन्य कर्मियों की भूमिका की जांच कर 7 दिवस में रिपोर्ट तलब की गई है।

हरिद्वार गोलीकांड में भी सख़्ती
भगवानपुर थाना क्षेत्र में रविदास जयंती के दौरान हुए संघर्ष और गोलीबारी की घटना में हल्का प्रभारी चुड़ियाला SI सूरत शर्मा को गंभीर लापरवाही के आरोप में निलम्बित किया गया। पूरे प्रकरण की जांच एसपी क्राइम, हरिद्वार को सौंपी गई है।

लैंड फ्रॉड पर सीओ स्तर की अनिवार्य जांच
ऊधमसिंहनगर के सुखवन्त सिंह आत्महत्या प्रकरण के बाद डीजीपी ने भूमि धोखाधड़ी के मामलों में क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर पर समयबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच अनिवार्य कर दी है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि मामला सिविल है या आपराधिक। लम्बित भूमि विवादों की पुलिस मुख्यालय से लगातार मॉनिटरिंग होगी।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत डीजीपी ने सतर्कता विभाग को निर्देश दिए कि भ्रष्ट आचरण में लिप्त पुलिस कर्मियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई की जाए।

बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। डीजीपी ने दोहराया कि पुलिस की विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं होगा और दोषी चाहे किसी भी पद पर हो, कार्रवाई तय है।

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