लक्सर

मुर्दा औरत ज़िंदा कर दी, फर्जी ‘शांति शरीफ’ बनाकर 3.98 हेक्टेयर ज़मीन हड़पी

चकबंदी कोर्ट के आदेश को रौंदते हुए रचा गया जमीन माफियाओं का खौफनाक खेल

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(फिरोज अहमद) लक्सर। लक्सर तहसील क्षेत्र में जमीन माफिया नेटवर्क ने कानून, अदालत और सरकारी तंत्र तीनों को खुली चुनौती देते हुए मृत महिला को ज़िंदा दिखाकर कृषि भूमि का बैनामा कर डाला। मामला ग्राम ऐथल बुर्जुग की खसरा संख्या 66, रकबा 3.98 हेक्टेयर से जुड़ा है, जहाँ 1995 में मर चुकी शांति शरीफ को दोबारा “जिंदा” कर फर्जी महिला के जरिए बैनामा निष्पादित कराया गया। चकबंदी न्यायालय द्वारा वर्ष 1995 में शांति शरीफ का नाम राजस्व अभिलेखों से हटाकर चरनजीत कौर को विधिवत भूमिधर घोषित किया गया था। इतना ही नहीं, वर्तमान में विवाद विचाराधीन होने के चलते 19 फरवरी 2024 को न्यायालय ने साफ शब्दों में किसी भी तरह के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद 6 मार्च 2025 को जमीन का बैनामा कर दिया गया। फर्जी औरत, असली कागज—सिस्टम पर सीधा हमला आरोप है कि हमीदा नामक महिला को शांति शरीफ बताकर उसके फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड व अन्य दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हीं कूटरचित कागजों के दम पर हिमांशु चौधरी व गीता चौधरी के पक्ष में जमीन का बैनामा कराया गया। जबकि असली शांति शरीफ की मृत्यु 8 नवंबर 1995 को हो चुकी है, जिसका प्रमाण पत्र मौजूद है। खेत पर धमकी, लाश गाड़ने तक की चेतावनी घटना के दिन खेत पर पहुंचे अज्ञात लोगों ने न केवल गाली-गलौज की बल्कि खुलेआम धमकी दी। आज के बाद दिखे तो इसी जमीन में गाड़ दी। पीड़ित का कहना है कि यह जमीन उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है और इसी पर कब्जा जमाने की साजिश रची गई। वहीं पीड़ित ने 22 मार्च 2025 को कोतवाली लक्सर में तहरीर दी, लेकिन न एफआईआर दर्ज हुई और न ही रिसीविंग दी गई। इसके बाद 25 अगस्त 2025 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार को भी प्रार्थना पत्र सौंपा गया, परंतु वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं अंततः पीड़ित ने न्यायालय की शरण लेकर मांग की है कि फर्जी महिला, बैनामा कराने वाले कथित खरीदारों और इस पूरे षड्यंत्र में शामिल लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक षड्यंत्र व जान से मारने की धमकी जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाए।

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