लक्सर

हरिद्वार जिले में हादसों का बढ़ता ग्राफ, जिम्मेदार कौन?

फिरोज अहमद समाचार सम्पादक

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(फिरोज अहमद) लक्सर। हरिद्वार जिले में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते लगभग दो माह के भीतर 20 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है। ओवरलोड वाहनों की बेलगाम रफ्तार, ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपरों का दबदबा, खराब सड़कें और लापरवाही इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार कौन है और कब लगेगी इन हादसों पर लगाम धार्मिक नगरी हरिद्वार में इन दिनों सड़कें सुरक्षित नहीं बल्कि जानलेवा साबित हो रही हैं। जिले के लक्सर, खानपुर, मंगलौर और रुड़की क्षेत्रों में लगातार हो रहे सड़क हादसे चिंता का विषय बन चुके हैं। आए दिन ओवरलोड डंपर, गन्ने से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और तेज रफ्तार भारी वाहन छोटे वाहनों को टक्कर मार रहे हैं। कई मामलों में मौके पर ही लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। बीती देर रात भी लक्सर में बालावाली मार्ग पर अकोढा कला गांव के पास गन्ने से लदी ट्रैक्टर ट्राली ने एक बाइक सवार व्यक्ति को टक्कर मार दी जिसमे पंडित पुरी गांव निवासी लोकेंद्र की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ओवरलोड वाहनों के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई होती है। कभी-कभार चेकिंग अभियान चलाकर खानापूर्ति कर ली जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही ने खतरा और बढ़ा दिया है। रात के समय बिना रिफ्लेक्टर और बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे वाहन हादसों को खुला न्योता दे रहे हैं। प्रशासन और परिवहन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर क्यों नियमित अभियान नहीं चलाए जा रहे क्यों ओवरलोडिंग पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो रही यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और भयावह हो सकता है। हर दिन कोई न कोई हादसा हो रहा है। प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ओवरलोड वाहनों पर तुरंत रोक लगे जरूरत है कि पुलिस, परिवहन विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से व्यापक अभियान चलाएं। ओवरलोड वाहनों की स्थायी निगरानी, स्पीड कंट्रोल, ब्लैक स्पॉट की पहचान और सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों को गंभीरता से लागू किया जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन बढ़ते हादसों पर कब तक प्रभावी लगाम लगाता है या फिर यूं ही सड़कों पर जिंदगियां असमय काल के गाल में समाती रहेंगी।

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