राजकीय विद्यालय की भूमि पर कब्जे का विवाद, प्रशासन की पैमाइश के बावजूद नहीं हटाया गया अवैध कब्जा
फिरोज अहमद/मोहम्मद उस्मान

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(फिरोज अहमद/मोहम्मद उस्मान) लक्सर। ब्लॉक नारसन के ग्राम अकबरपुर ढाढ़ेकी में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के लिए प्रस्तावित सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई उस समय विवादों में घिर गई, जब प्रशासनिक पैमाइश के बावजूद कब्जाधारी द्वारा भूमि की पैमाइश करने आए अधिकारियों पर ग़लत पैमाइश करने का आरोप लगाकर दोबारा पैमाइश कराने की बात की गई।
नायाब तहसीलदार रुड़की यूसुफ मलिक की मौजूदगी में कानूनगो एवं हल्का लेखपाल द्वारा प्रस्तावित भूमि की विधिवत पैमाइश कर निशानदेही कराई गई। इस दौरान कब्जाधारी ओमवीर के पुत्रों ने प्रशासन द्वारा की गई निशानदेही पर सहमति भी जताई।
हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों के मौके से चले जाने के बाद कब्जाधारी ओमवीर ने नायाब तहसीलदार की मौजूदगी में कराई गई पैमाइश और निशानदेही को गलत बताते हुए उक्त भूमि को विद्यालय हेतु प्रस्तावित भूमि से कब्जा हटाने से इनकार कर दिया। और दोबारा पैमाइश कराने की बात कही।
इस संबंध में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि फरमान अली ने बताया कि यह भूमि शासन द्वारा राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नाम दर्ज है तथा पूर्व में भी प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उक्त भूमि को कब्जामुक्त कराया जा चुका था। उन्होंने बताया कि कुछ समय बाद कब्जाधारी ओमवीर ने स्टे ऑर्डर का हवाला देते हुए दोबारा भूमि की जुताई शुरू कर दी और फसल बो दी।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में कोई स्टे ऑर्डर प्राप्त हुआ था, तो भूमि को उसी अवस्था में बनाए रखना चाहिए था, लेकिन कब्जाधारी द्वारा जुताई कर फसल बोना स्टे ऑर्डर की शर्तों का उल्लंघन प्रतीत होता है।
मामले ने अब गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार प्रदेशभर में सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान के लिए आवंटित भूमि भी अवैध कब्जे से मुक्त नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय निर्माण में आ रही बाधा को तत्काल दूर किया जाए और सरकारी भूमि को पूरी तरह कब्जामुक्त कर विद्यालय निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए।









