रुड़की

ईद पर विशेष- एक माह के रोजे का इनाम है ईद का त्यौहार…

इमरान देशभक्त रुड़की प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(इमरान देशभक्त) रुड़की। रमजान के एक महीने के रोजे रखने के बाद जो खुशी का दिन आता है उसे हम ईद उल फितर कहते हैं अर्थात ईद का त्यौहार।तीस रोजों का इनाम है ईद। ईदुलफितर का अर्थ ऐसे दिन का है जो बार-बार वापस आए और फितर का अर्थ तोड़ना।एक महीने रोजे रखना फिर रोजा तोड़ने के बाद ईद की खुशी का दिन प्रतिवर्ष आता है,इसलिए इसे ईदुल फितर कहा जाता है।पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बताया कि ईद का दिन खुशी का है।आज ही के दिन अल्लाह के दरबार से रोजे का सवाब मिलेगा और उनकी मेहनत की मजदूरी बांटी जाएगी,जब ईद का दिन आता है तब अल्लाह इन रोजेदारों के बारे में मालूम करता है कि ए फरिश्तों इन मजदूरों की क्या मजदूरी है।फरिश्ते कहेंगे अल्लाहु रब्बुल इज्जत इसका बदला यह है कि इसकी पूरी मजदूरी दी जाए और फिर कहते हैं कि इन लोगों ने अपना वह कार्य पूरा किया,जो इन्हें बताया गया था।वह अल्लाह की बडाई करते हुए ईदगाह गए और शुकराना (धन्यवाद) अदा किया,फिर अल्लाह फरमाएगा कि मैंने इनके गुनाहों-पापों को क्षमा किया और नेकियों से बदल दिया,इसलिए ईद का दिन अल्लाह के दरबार से इनाम मिलने का दिन भी है,इसीलिए कहा गया है कि ईद के दिन अच्छे कपड़े पहनकर खुशबू लगाकर ईदगाह जाओ।

पैगंबर रसूल पाक की ईद
ईद के दिन पैगंबर रसूल अल्लाह अपने नवासों हसन और हुसैन की उंगलियां पकड़े ईदगाह जा रहे थे।हसन और हुसैन खुशी के साथ पैगंबर रसूल अल्लाह से कुछ कह रहे थे कि अचानक बच्चों की एक टोली को खेलते हुए देखा की एक बच्चा सबसे अलग गुमसुम खड़ा है,जो खेल में शामिल नहीं था।पैगंबर रसूल अल्लाह ने प्यार से बच्चे से अलग खड़े रहने का कारण पूछा तो बच्चे ने बताया कि उसके पिता जंग में शहीद हो गए,इसके बाद उसकी मां ने दूसरा निकाह कर लिया और मेरे पिता जिंदा होते तो मैं भी नए कपड़े पहनकर नमाज पढ़ने ईदगाह जाता। रसूल अल्लाह का दिल भर आया और बच्चे को गले से लगाए वापस मकान पर आए। नहलाया, धुले नए कपड़े पहनाए, आंखों में सुरमा लगाया और कहा कि आज से तुम यतीम (अनाथ) नहीं, मैं तुम्हारा पिता और हजरत आयशा (रसूल अल्लाह) की पत्नी तुम्हारी माता है और हसन व हुसैन तुम्हारे भाई।आज ईद मनाते समय यदि हम पैगंबर रसूल अल्लाह के कार्यों को देखें तो कोई भूखे और अनाथ न रह जाए, ईद हमें यह भी शिक्षा देती है।

ईद का उत्साह
जैसे ही ईद का चांद दिखाई देता है सभी लोग पूरे उत्साह के साथ ईद की तैयारी में लग जाते हैं।सुबह होते ही शहर व कस्बों की बड़ी मस्जिद में ईद की नमाज का क्रम शुरू हो जाता है,लेकिन सबसे बड़ी नमाज ईदगाह में पढ़ी जाती है।हर ईदगाह आबादी से दूर होती है,जहां मुसलमान बड़ी संख्या में अपने बाल-बच्चों को साथ लेकर ईद की नमाज अदा करने जाते हैं।इस अवसर पर ईदगाह स्थल पर मेले लगते हैं, जहां वे अपने बाल-बच्चों के लिए मिठाइयां और खिलौने आदि की खरीदारी करते हैं।ईदगाह पर हिंदू,सिख भाई अपने मुस्लिम भाइयों को ईद की मुबारकबाद देने और मिलने के लिए खड़े नजर आते हैं।सभी लोग एक-दूसरे से गले मिलते हैं, उसके बाद दिनभर लोग अपने-अपने मित्रों, रिश्तेदारों और मिलने वालों के यहां जाकर उन्हें ईद की बधाइयां देते हैं और इस पर्व पर विशेष रूप से बनाई गई सेवइयां खाते हैं।

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