हरिद्वार की गूंज (24*7)
(चिराग कुमार) हरिद्वार। सरस्वती विद्या मंदिर की वाणिज्य की प्रवक्ता नेहा जोशी ने कहा कि आज के दौर में अंक, रैंक और प्रतिशत ही सफलता के पैमाने बन गए हैं। ऐसे माहौल में कई अभिभावक अनजाने में अपने ही बच्चों की तुलना दूसरों से करने लगते हैं। जिससे बच्चों का आत्मविश्वास खो रहा है। लगातार तुलना बच्चे के भीतर असुरक्षा और भय पैदा करती है। वह अपनी क्षमता को पहचानने के बजाय स्वयं को दूसरों की कसौटी पर परखने लगता है। पढ़ाई उसके लिए ज्ञान अर्जन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि खुद को साबित करने का संघर्ष बन जाती है। परिणामस्वरूप बच्चों में मानसिक तनाव, निराशा और उनके आत्मविश्वास में गिरावट देखी जा रही है। नेहा जोशी ने कहा कि सच यह है कि हर बच्चा अलग है। उसकी रुचि, उसकी गति और उसकी प्रतिभा भी अलग है। परीक्षा या अंक किसी का संपूर्ण भविष्य निर्धारित नहीं कर सकते। आवश्यकता इस बात की है कि अभिभावक तुलना की जगह संवाद और समझ को महत्व दें। बच्चों को प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ में धकेलने के बजाय उनकी मौलिकता को पहचानना और प्रोत्साहित करना ही सशक्त समाज की नींव है। जब हम तुलना छोड़कर विश्वास देना सीखेंगे, तभी संतुलित और आत्मविश्वासी पीढ़ी तैयार होगी।









