हरिद्वार

श्रीनारायणी शिला पर पितरों का तर्पण

श्रीनारायणी शिला पर पितरों के स्थान पर पूजा करती हुई महिला

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(नीटू कुमार) हरिद्वार। रिद्वार में मायापुर स्थित श्रीनारायणी शिला पर हजारों की संख्या में श्रद्घालुओं ने पहुंचकर अपने अपने पितरों का तर्पण कर पुण्य लाभ कमाया। इस दौरान भारी भीड़ देखने को मिली। हरिद्वार में आज अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने हर की पौड़ी स्थित ब्रह्मकुंड में पवित्र स्नान कर अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान किया।

श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पावन धारा में डुबकी लगाकर अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। अमावस्या स्नान के अवसर पर सुबह लगभग चार बजे से ही हर की पौड़ी पर श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक गंगा में स्नान किया और अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया।

राजस्थान से आए कई परिवारों ने सामूहिक रूप से अपने पूर्वजों की अस्थि पूजन कर उन्हें गंगा में विसर्जित किया। इसके बाद गंगा स्नान और तर्पण कर अपने गंगा पुरोहितों को दान-दक्षिणा अर्पित की तथा परिवार की कुशलता, धन-समृद्धि और व्यापार में वृद्धि की कामना की।

अमावस्या स्नान के बाद श्रद्धालु हर की पौड़ी ब्रह्मकुंड से गंगाजल भरकर अपने-अपने गंतव्य की ओर लौटते नजर आए। आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है। इसलिए श्रद्धालु गंगाजल लेकर अपने घर पहुंचकर स्थान को पवित्र करेंगे और कलश स्थापना के साथ माता की पूजा-अर्चना शुरू करेंगे।

वहीं, तीर्थ नगरी हरिद्वार के विभिन्न मां के मंदिरों में नवरात्रि को लेकर सफाई और सजावट का कार्य भी शुरू हो गया है। मंदिरों में धुलाई-सफाई और पूजा की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी आस्था के चलते हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से हरिद्वार पहुंचकर मां गंगा की पवित्र धारा में डुबकी लगाते हैं। अमावस्या के इस पावन अवसर पर हरिद्वार एक बार फिर श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपरा का अद्भुत केंद्र बनकर सामने आया, जहां मां गंगा की पावन धारा में डुबकी लगाकर श्रद्धालुओं ने अपने जीवन को पवित्र बनाने का संकल्प लिया।

Related Articles

Back to top button