हरिद्वार

जिला कारागार में कैदी सीख रहे मन की साधना, जीवन जीने की कला

वेद प्रकाश चौहान मुख्य सह सम्पादक

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(वेद प्रकाश चौहान) हरिद्वार। श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग चैप्टर हरिद्वार के द्वारा रोशनाबाद जेल में 6 दिवसीय सेमिनार का आज समापन हुआ। बंदियों को सिखाया गया कि कैसे आप मन की साधना करके अपना जीवन सुधार सकते हैं, अपने मन से बदले की भावना से छुटकारा पा सकते हैं और जब आप वापस घर जाएं तो एक अच्छा इंसान बनकर जाएं। आर्ट ऑफ़ लिविंग के सीनियर टीचर श्री तेजिंदर सिंह ने बताया कि इनको 6 दिन में योग, ध्यान और सांसों की सुदर्शन क्रिया सिखाई गई। सुदर्शन क्रिया अपने आप में एक अद्भुत चमत्कारी किर्या है जिससे शरीर मन और आत्मा तीनों का सुधार होता है। आप नए सकारात्मक विचारों से भर जाते हैं। आपके सोचने का ढंग बदलने लगता है और धीरे-धीरे आप वर्तमान में रहना सीख जाते हैं और हर परिस्थिति को आसानी से पार कर जाते हैं।
रवि शंकर जी के द्वारा प्रदान की गई सुदर्शन क्रिया नियमित करने से तनाव कम होने लगता है, नींद की सभी प्रॉब्लम हल हो जाती हैं और शरीर में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। आज समापन समारोह में सभी कैदियों ने मिलकर सत्संग किया, जेल परिसर ओम नमः शिवाय भजनों से गूंज उठा। इस मौके पर डॉक्टर आरसी गैरोला जी ने कहा ईश्वर हम सबके भीतर है बस उसे महसूस करने आना चाहिए सुदर्शन क्रिया करने से मन नेगेटिव विचारों से निर्मल होने लगता है और जैसे-जैसे मन शांत होते लगता है हम ईश्वर को अपने भीतर महसूस कर सकते हैं और और दूसरों में भी महसूस कर सकते हैं देख सकते हैं। आर्ट ऑफ़ लिविंग के इस शिवर से कैदियों को मानसिक शांति मिलती है शरीर स्वस्थ होने लगता है। हम चाहते हैं आर्ट ऑफ लिविंग भविष्य में भी ऐसे शिवर करते रहें ताकि हमारे सभी कैदी इसका फायदा उठा सकें। इस शिवर को करने में मनोज कुमार आर्य सीनियर सुपरीटेंडेंट जेल, डॉक्टर आरसी गैरोला और प्यारेलाल आर्य प्रभारी जेलर का मार्गदर्शन मिला और हर तरह से सफल बनाने में मनीष बहुगुणा जीके सहयोग से यह शिविर सुंदर तरीके से संपन्न हुआ।

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