
हरिद्वार की गूंज (24*7)
(चिराग कुमार) हरिद्वार। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने सभी को होली की शुभकामनाएं देते हुए पारंपरिक रूप से होली मनाने का आह्वान किया। होली के पौराणिक महत्व से अवगत कराते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि होली बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। उन्होंने कहा कि हिरण्य कश्यपु का पुत्र प्रह्लाद भगवान नारायण का परम् भक्त था। हिरण्य कश्यपु इससे प्रसन्न नहीं था। उसने प्रह्लाद से नारायण की भक्ति छोड़ने को कहा। लेकिन प्रह्लाद ने इसे मानने से इंकार कर दिया। इससे क्रोधित होकर उसने प्रह्लाद का मारने योजना बनायी और प्रह्लाद की बुआ होलिका जिसे अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था, को प्रह्लाद को लेकर अग्नि कुंड में बैठने को कहा। होलिका प्रह्लाद को लेकर अग्नि कुंड में बैठ गयी। लेकिन भगवान नारायण की कृपा से होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गयी और प्रह्लाद सकुशल बच गए। इसके बाद से बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में होली मनाने की परंपरा शुरू हुई। स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि सभी मिलजुल कर परंपरागत रूप से होली मनाएं।









