हरिद्वार

कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने दिल्ली में कराई उत्तराखंड के वरिष्ठ नेताओं की ज्वाइनिंग

पूर्व मेयर के आने से कांग्रेस हुई मजबूत, समर्थकों में खुशी की लहर

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(इमरान देशभक्त) रुड़की। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नई दिल्ली स्थित केन्द्रीय कार्यालय पर उत्तराखंड की राजनीति से जुड़े आधा दर्जन बड़े नेताओं को औपचारिक सदस्यता दिलाई गई। कांग्रेस की वरिष्ठ केंद्रीय नेता एवं उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा सहित प्रदेश के तमाम बड़े नेताओं के समक्ष, जिन बड़े नेताओं को कांग्रेस में शामिल किया गया है, उनमें रुड़की के मेयर रह चुके गौरव गोयल सहित रुद्रपुर के पूर्व भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल व भीमलाल आर्य, नारायण पाल पूर्व बसपा विधायक, पूर्व ब्लाक प्रमुख लखन सिंह व पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मसूरी अनुज गुप्ता के नाम प्रमुख है। कांग्रेस पार्टी में शामिल होने वाले सभी नेताओं का कुमारी शैलजा द्वारा पटका पहनाकर स्वागत किया गया। इस दौरान उत्तराखंड से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही। पूर्व मेयर गौरव गोयल अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेसी नेताओं ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि इनके जुड़ने से पार्टी को मजबूती मिलेगी तथा उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी का जनाधार मजबूत होगा। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा सरकार सभी मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। भ्रष्टाचार चरम पर है, अपराधिक घटनाएं बढ़ी हुई हैं। कुमारी शैलजा ने अपने लंबे संबोधन में प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अंकिता भंडारी सहित अनेक घटनाओं का जिक्र कर कहा कि आज प्रदेश जिस अराजकता के दौर से गुजर रहा है, उससे प्रदेश की जनता मुक्ति पाना चाहती है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत, करण माहरा व प्रीतम सिंह तथा वरिष्ठ विधायक तिलकराज बेहट और काजी निजामुद्दीन ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और हम सब मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव में बहुमत से जीत हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि इन साथियों के जुड़ने से संगठनात्मक ताकत बढ़ेगी। सदस्यता ग्रहण का यह दिन उत्तराखंड की सियासत में एक बड़े और निर्णायक बदलाव का गवाह बना, जिसमें सत्ताधारी दल भाजपा के खेमे में हलचल तेज कर दी है। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों से लेकर देहरादून तक इस वक्त केवल एक ही चर्चा है कि किस तरह कांग्रेस ने भाजपा के अभेद्य माने जाने वाले किलों में सेंधमारी की। अट्ठाईस मार्च की यह तारीख प्रदेश की राजनीति में इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि कांग्रेस ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत भाजपा के उन कद्दावर नेताओं को अपने पाले में खींच लिया, जो कभी भाजपा की रीढ़ माने जाते थे।दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और प्रदेश प्रभारी की गरिमाई उपस्थिति में इस सदस्यता ग्रहण समारोह ने साबित कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अभी से अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। कांग्रेस के हाथ को मजबूती देने वाले इन नामों में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला नाम रुद्रपुर के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और रुड़की के पूर्व मेयर गौरव गोयल का है। रुड़की के पूर्व मेयर गौरव गोयल का कांग्रेस में शामिल होना बताता है कि कांग्रेस अब केवल पहाड़ों तक सीमित रहने के बजाय मैदानी इलाकों में भी भाजपा को उसी की भाषा में जवाब देने के मूड में है। इन दोनों दिग्गजों के साथ भाजपा के कई अन्य बड़े नेताओं की सदस्यता ने साफ कर दिया है कि भाजपा के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इस दल-बदल के पीछे के कदम का अगर विश्लेषण किया जाए तो सबसे बड़ी वजह टिकट की अनिश्चिता और उपेक्षा देखी जा रही है। भाजपा के भीतर जिस तरह से नए चेहरे को तरजीह दी जा रही है और बाहरी नेताओं का दखल बढ़ा है, उससे पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी है। राजकुमार ठुकराल जैसे नेता जो पहले भी टिकट नहीं मिलने पर अपनी ताकत दिखा चुके हैं। उन्हें आगामी 2027 के चुनाव में अपना भविष्य भाजपा के भीतर धुंधला नजर आ रहा था। इन नेताओं को महसूस होने लगा था कि जिस पार्टी को उन्होंने खून पसीने से खींचा है, वहां अब उनकी अहमियत कम हो गई है, साथ ही प्रदेश में उभर रही एंटी-इंकंबेसी की लहर को भांपते हुए इन मंझे हुए राजनेताओं ने वक्त रहते विपक्ष के नाव पर सवार होना ही बेहतर समझा, ताकि वह आने वाले समय में सत्ता विरोधी लहर का सीधा राजनीतिक लाभ उठा सके‌। कांग्रेस के लिए इन नेताओं का साथ आना किसी संजीवनी से कम नहीं है। उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस को हमेशा मैदानी जिला खासकर उधमसिंह नगर और हरिद्वार में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता रहा है, अब गौरव गोयल और राजकुमार ठुकराल जैसे नेताओं के आने से इन क्षेत्रों में कांग्रेस का कैडर ना केवल मजबूत होगा, बल्कि पार्टी को एक बड़ा वोट बैंक भी सीधे तौर पर मिल जाएगा। यह भाजपा के लिए एक मनोवैज्ञानिक दबाव भी है, क्योंकि चुनाव से काफी पहले अपने ही दिग्गज नेताओं का साथ छोड़ना जनता के बीच यह संदेश देता है कि सत्ताधारी दल के भीतर असंतोष चरम पर है। कांग्रेस सब इन मुद्दों को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती और खुद को भाजपा के एकमात्र विकल्प के रूप में पेश करना चाहती है।

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