देहरादून

जब रिश्ते बिके, कानून जागा: फर्जी रीता रानी बनकर हुआ बैनामा

राजेश पसरीचा देहरादून प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश पसरीचा) ऋषिकेश। अपराध जब रिश्तों की मर्यादा लांघता है तो वह केवल कानून नहीं, समाज को भी झकझोर देता है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला ऋषिकेश में सामने आया है, जहां एक पुत्र ने अपनी ही माँ को हथियार बनाकर जमीन हड़पने की साजिश रची। फर्जी पहचान और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे किया गया यह अपराध आखिरकार कानून की पकड़ में आ ही गया।

कोतवाली ऋषिकेश पुलिस ने वर्ष 2021 से फरार चल रही महिला आरोपी ममता शर्मा पत्नी देवेंद्र कुमार शर्मा, निवासी दौलतपुर मेरठ (उ.प्र.) को रुड़की से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी महिला को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से कोर्ट के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार यह मामला तब सामने आया जब गुरुग्राम निवासी निकुंज गोयल ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी माता रीता रानी की गैर मौजूदगी में एक महिला ने खुद को रीता रानी बताकर उनकी जमीन का बैनामा कर दिया। जांच में सामने आया कि यह पूरी साजिश सुनियोजित थी, जिसमें कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए और पहचान छिपाने के लिए रिश्तों का दुरुपयोग किया गया।

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि खुद को रीता रानी बताने वाली महिला कोई और नहीं बल्कि अंकुर दत्त शर्मा की माँ ममता शर्मा थी। बेटे की इस साजिश में माँ को आगे कर दिया गया, ताकि शक की गुंजाइश न रहे। इस मामले में हरकेश कुमार, मुकेश कुमार प्रजापति, हरिओम सक्सेना, अंकुर दत्त शर्मा और राजेश कुमार के नाम भी मुकदमे में दर्ज हैं।

पुलिस के अनुसार पहचान उजागर होते ही ममता शर्मा गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गई और लगातार ठिकाने बदलती रही। चार वर्षों तक कानून से बचने के बाद आखिरकार कड़ी सुरागसी और मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उसे रुड़की से गिरफ्तार कर लिया।

श्यामपुर चौकी प्रभारी सुमित चौधरी द्वारा गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस का कहना है कि इस मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।

समाज के लिए सबक बनी क्राइम स्टोरी

यह मामला केवल जमीन घोटाले का नहीं, बल्कि रिश्तों के पतन और लालच की हद का उदाहरण है। जब बेटा अपनी माँ को अपराध का औजार बना दे, तो यह समाज के लिए चेतावनी है कि अपराध में नैतिकता, उम्र और रिश्ता—कुछ भी आड़े नहीं आता। कानून भले देर से पहुंचे, लेकिन अंततः सच और सजा तय है।

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