राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चाणक्य शाखा में एकत्रीकरण, 147 स्वयंसेवकों की रही उपस्थिति
क्षेत्र सन्त सर्म्पक प्रमुख ईश्वरदयाल व विभाग सम्पर्क प्रमुख कुँवर रोहिताश ने बताया शाखा का महत्व

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(चिराग कुमार) हरिद्वार। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चाणक्य शाखा का साप्ताहिक एकत्रीकरण आज आर्य नगर चौक स्थित शाखा स्थान में उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष एकत्रीकरण में 147 स्वयंसेवकों ने भाग लिया।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में क्षेत्र सन्त संर्पक प्रमुख ईश्वर दयाल उपस्थित रहे। वहीं दक्षिण उप नगर शारीरिक शिक्षण प्रमुख अमरेशजी के निर्देशन में स्वयंसेवकों ने दंड, नियुद्ध, योग और खेल के कार्यक्रम किए। शाखा कार्यवाह राजेन्द्र ने बताया कि चाणक्य शाखा पिछले कई वर्षों से निरंतर चल रही है और वर्तमान में यह हरिद्वार नगर की सबसे बड़ी शाखाओं में से एक है। एकत्रीकरण में 14 वर्ष से 70 वर्ष तक के स्वयंसेवक शामिल हुए। बाल, तरुण, युवा और प्रौढ़ सभी श्रेणियों के स्वयंसेवकों की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
बौद्धिक सत्र में क्षेत्र सन्त सम्पर्क प्रमुख ईश्वरदयाल ने ‘शताब्दी वर्ष में स्वयंसेवक का दायित्व’ विषय पर चर्चा करते हुए कहा संघ ने 1925 में डॉ. हेडगेवार जी के नेतृत्व में जो यात्रा प्रारंभ की थी, आज वह 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। यह केवल संगठन का नहीं, राष्ट्र के पुनरुत्थान का शताब्दी वर्ष है। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का है। शाखा वह स्थान है जहां सामान्य व्यक्ति से असामान्य कार्यकर्ता गढ़ा जाता है। चाणक्य शाखा का नामकरण भी इसी उद्देश्य से किया गया था। जैसे चाणक्य ने चंद्रगुप्त को गढ़कर अखंड भारत का निर्माण किया, वैसे ही शाखा से निकला हर स्वयंसेवक समाज का नेतृत्व करने में सक्षम होना चाहिए।
विभाग संर्पक प्रमुख कुँवर रोहिताश ने राष्ट्र भक्ति के गीतों से स्वयंसेवको में ऊर्जा का संचार करते हुए प्रत्येक स्वयंसेवक से प्रतिदिन शाखा आने का आग्रह किया, उन्होंने शताब्दी वर्ष के पंच परिवर्तन के मंत्र को विस्तार से समझाया। पंच परिवर्तन में पहला स्व का बोध, उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी अपनी संस्कृति से कट रही है। घर में हिंदी बोलने में शर्म आती है, पर अंग्रेजी बोलने पर गर्व होता है। हमें अपने स्वाभिमान को जगाना होगा। तिलक लगाना, घर में तुलसी रखना, भारतीय वेशभूषा पहनना, यह सब स्व का बोध है। हर स्वयंसेवक अपने परिवार से इसकी शुरुआत करे। समाज में व्याप्त ऊंच-नीच, छुआछूत की भावना को समाप्त करना होगा। संघ की शाखा में कोई जाति नहीं पूछी जाती। यही भाव पूरे समाज में ले जाना है। तीसरा कुटुंब प्रबोधन, पश्चिम में परिवार व्यवस्था टूट चुकी है। भारत अभी भी बचा हुआ है। लेकिन मोबाइल और टीवी ने हमारे घरों का संवाद खत्म कर दिया है। हर घर में सप्ताह में एक दिन ‘कुटुंब सभा’ हो। साथ बैठकर भोजन करें, भजन करें, बच्चों को कहानी सुनाएं। संस्कार युक्त परिवार ही मजबूत राष्ट्र की नींव है। चौथा पर्यावरण संरक्षण,
गंगा, यमुना, पेड़, पहाड़ हमारी संस्कृति में पूजनीय हैं। लेकिन आज हम ही इन्हें गंदा कर रहे हैं। हर स्वयंसेवक संकल्प ले कि वर्ष में 11 पेड़ लगाएगा और उनकी रक्षा करेगा। प्लास्टिक का उपयोग बंद करे। जल है तो कल है। पांचवा नागरिक कर्तव्य, हम अधिकार की बात तो करते हैं पर कर्तव्य भूल जाते हैं। सड़क पर थूकना, कतार तोड़ना, कर चोरी करना, यह सब देश को कमजोर करता है। स्वच्छता, अनुशासन और ईमानदारी हर नागरिक का धर्म है। एकत्रीकरण में नगर संघचालक एडवोकेट ज्ञानेश्वर ठकराल, नगर सम्पर्क प्रमुख सुशील सैनी, दक्षिण उप नगर सह व्यवस्था प्रमुख बौद्धिक प्रमुख देवी प्रसाद, मुख्य शिक्षक अरुण, बस्ती प्रमुख ब्रह्मपाल, सह बस्ती प्रमुख कुशलपाल व वेदपाल, प्रमोद, सुरेन्द्र, डॉ. अश्वनी, विवेक आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के बाद सभी स्वयंसेवकों ने सामूहिक सूक्ष्म जलपान किया।









