ऊपर बिजली के तार, नीचे भारी बारिश का पानी और बीच में श्रद्धालु—साबिर पाक उर्स की सुरक्षा व्यवस्था बनी चर्चा का विषय
चांदी काटने के चक्कर में श्रद्धालुओं की जान से खिलवाड़ तो नहीं, उर्स की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ/जावेद अंसारी) हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक के सालाना उर्स में जहां देश-दुनिया से लाखों जायरीन और श्रद्धालु आस्था लेकर पहुंचे है, वहीं इस बार उर्स की कुछ व्यवस्थाओं को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार भी गर्म है।विशेष रूप से लगातार हो रही बारिश, जलभराव और बिजली के तारों के बीच संचालित हो रहे मनोरंजन संसाधनों को लेकर श्रद्धालुओं में सुरक्षा संबंधी चिंताएं दिखाई दीं हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि उर्स के दौरान झूले क्षेत्र में जगह-जगह स्थानों पर बिजली के तार फैले हुए नजर आए है। दूसरी ओर लगातार हो रही बारिश के कारण जगह जगह पानी जमा होने की स्थिति भी बनी रही। ऐसे में बिजली से संचालित होने वाले झूले एवं अन्य मनोरंजन संसाधनों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों के मन में सवाल उठ रहे है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा रही है कि यदि बारिश के दौरान किसी बिजली के तार अथवा बिजली से संचालित उपकरण में तकनीकी खराबी आ जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है। पानी और बिजली का एक साथ होना हमेशा खतरे की संभावना को बढ़ाता है, ऐसे में हजारों लोगों की भीड़ वाले उर्स मेले में अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता महसूस की जा रही है। चर्चा है कि उर्स में आने वाले बच्चों, महिलाओं और परिवारों द्वारा मनोरंजन के लिए झूलों एवं अन्य मनोरंजन संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। और क्षेत्रीय चर्चा के अनुसार कई स्थानों पर बिजली के तारों की व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर पर्याप्त सावधानी दिखाई नहीं दी। लोगों की चर्चाओं में सवाल है कि क्या बिजली से चलने वाले मनोरंजन संसाधनों की नियमित तकनीकी जांच की जा रही है? क्या बारिश और जलभराव की स्थिति में बिजली के उपकरणों को लेकर कोई विशेष सुरक्षा योजना बनाई गई? चर्चा है कि लाभ कमाने की दौड़ में सुरक्षा तो पीछे नहीं छूट गई। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि उर्स ठेकेदार द्वारा मनोरंजन संसाधनों से केवल अधिकतम लाभ कमाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजामों पर उतना कोई ध्यान नहीं है। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों और उर्स में पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर लगातार चर्चाओं में सवाल उठ रहे है। लोगों में चर्चा है कि करोड़ों रुपये के स्तर पर आयोजित होने वाले विशाल धार्मिक आयोजनों में प्रशासन और मेला प्रबंधन की पहली प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुरक्षा होनी चाहिए। चर्चा है कि बिजली के तार खुले अथवा असुरक्षित तरीके से पड़े हों, बारिश के कारण जमीन पर पानी जमा हो और उसी स्थान पर बिजली से चलने वाले झूले एवं अन्य उपकरण संचालित हो रहे हों तो किसी भी अप्रिय घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। क्षेत्रीय लोगों में चर्चा है कि इस बार उर्स में लगातार हो रही जबरदस्त बारिश के बावजूद बिजली और मनोरंजन संसाधनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रही है। और अब तक गनीमत है कि कोई बड़ा हादसा सामने नहीं आया, चर्चाओं में सवाल है कि क्या प्रशासन और मेला प्रबंधन किसी घटना के बाद ही जागते हैं। पहले क्यों नहीं। श्रद्धालुओं में चर्चा है कि धार्मिक आयोजन में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपनी आस्था के साथ-साथ प्रशासन और मेला प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर भी भरोसा करता है। ऐसे में उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित विभागों और आयोजकों की जिम्मेदारी है। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि उर्स में ठेकेदारों को व्यवसायिक लाभ पहुंचाने के लिए व्यवस्थाएं तो तेजी से की गई, लेकिन सुरक्षा मानकों की निगरानी को लेकर मेला प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा है। क्षेत्रीय चर्चा है कि भारी बरिश के दौरान तारों में दौड़ती मौत बिजली को लेकर मेला प्रशासन और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को समय-समय पर निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि बारिश और जलभराव के दौरान बिजली से संचालित किसी भी उपकरण से श्रद्धालुओं को खतरा तो नहीं है। इस और प्रशासन जीरो भूमिका में रहा है। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि भविष्य में उर्स जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों में बिजली के तारों को सुरक्षित तरीके से लगाने, अर्थिंग की व्यवस्था, जलभराव रोकने, मनोरंजन उपकरणों की तकनीकी जांच कराने और बारिश के दौरान विशेष सुरक्षा प्रबंध करने की आवश्यकता है। साबिर पाक के उर्स की समाप्ति के बाद भी क्षेत्र में एक ही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है क्या इस बार लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का जोखिम तो नहीं लिया गया है? क्या बारिश, जलभराव और बिजली से चलने वाले मनोरंजन संसाधनों के बीच पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम है? और सबसे बड़ा सवाल यह कि अगर कोई हादसा हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्योंकि अभी मनोरंजन संसाधन के चक्के घूम रहे है। ऊपर से भारी बारिश भी लगातार हो रही है।फिलहाल क्षेत्रीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच उर्स की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा ही चर्चा है। लोग चाहते हैं कि भविष्य में आस्था के इस विशाल आयोजन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो और श्रद्धालुओं की जान की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा जाए। तभी धार्मिक आयोजनों को सुरक्षित माना जा सकता है।









