क्या साबित पाक उर्स में देर रात तक झूले चलाने की खुली छूट है कानून से ऊपर दिख रहा ठेकेदार या प्रशासन की अनुमति, चर्चाओं का बाजार गर्म
मोहम्मद आरिफ/जावेद अंसारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध साबिर पाक के सालाना उर्स में जहां देश-विदेश से लाखों जायरीन अपनी आस्था लेकर पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर उर्स में देर रात तक संचालित हो रहे झूले और मनोरंजन संसाधन अब चर्चा का बड़ा विषय बनते जा रहे हैं। चर्चा है कि आखिर उर्स में झूले और अन्य मनोरंजन संसाधनों को देर रात्रि तक चलाने की अनुमति किस नियम और किस समय सीमा के अंतर्गत दी गई है। क्यों की आधी रात से ऊपर भी झूलो और अन्य मनोरंजन संसाधनों के चक्की रुक नहीं पा रहे हैं। चर्चा है कि क्या प्रशासन द्वारा झूलो संचालन के लिए कोई निर्धारित समय तय करता है या फिर नियम केवल कागजों तक सीमित हैं? यह सवाल क्षेत्रीय फिजाओं में खूब चर्चा का विषय बने हुए है। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि देर रात तक झूले संचालित किए जा रहे हैं। यदि प्रशासन ने समय सीमा निर्धारित की है तो उसका पालन क्यों नहीं हो रहा है और यदि कोई विशेष अनुमति दी गई है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती है? जगह-जगह लाउड स्पीकरों के माध्यमों से सुरक्षा के मध्यनजर उर्स में आने वाले श्रद्धालुओं को जागरूक किया जाता है। आखिरकार लाउड स्पीकरों के माध्यम से ही झूले संचालित तय सीमा की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती है। क्या ठेकेदार को लाभ पहुंचाने व कमाई की होड़ में नियमों की अनदेखी हो रही है। चर्चाओं के बीच यह भी कहा जा रहा है कि उर्स का ठेका लेने वाले लोग अधिक से अधिक आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से देर रात तक झूले और मनोरंजन के साधन संचालित कर रहे हैं और क्या व्यापारिक लाभ के सामने कानून और प्रशासनिक नियमों को नजरअंदाज किया जा सकता है। लोगों में चर्चा है कि आम दुकानदार, वाहन चालक और छोटे कारोबारी नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के दायरे में आ जाते हैं, लेकिन उर्स में बड़े स्तर पर संचालित संसाधनों के मामलों में आखिर जिम्मेदार विभागों की नजर क्यों नहीं पड़ रही है। चर्चा देर रात तक झूले किसकी अनुमति से चल रहे हैं। यदि निर्धारित समय सीमा के बाद संचालन हो रहा है तो संबंधित विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है और यदि अनुमति है तो उसकी शर्तें तो कुछ होगी। जिनका उर्स के दौरान सार्वजनिक होना अति आवश्यक होता है। लेकिन ठेकेदार को लाभ पहुंचने की होड़ में उन शर्तों को भी छुपा लिया जाता है। चर्चा यह भी है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उर्स ठेकेदार अपने नियम स्वयं तय कर रहा है और कानून को ठेंगा दिखाकर देर रात तक झूले व अन्य मनोरंजन संसाधनों का संचालन कर रहा है। चर्चा है कि उर्स जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में सुरक्षा, शांति व्यवस्था और निर्धारित नियमों का पालन बेहद जरूरी है। ऐसे में प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए
उर्स मेले में झूले चलाने की निर्धारित समय सीमा क्या है?
देर रात तक संचालन की अनुमति किसके द्वारा दी गई है?
क्या ठेकेदार को विशेष अनुमति प्राप्त है? समय सीमा का उल्लंघन पाए जाने पर क्या कार्रवाई होगी? पुलिस और प्रशासन द्वारा रात्रिकालीन निरीक्षण किया जा रहा है या नहीं?
चर्चा ही चर्चा
साबिर पाक का उर्स आस्था और भाईचारे का बड़ा केंद्र है, लेकिन मेले के संचालन को लेकर लगातार उठ रही चर्चाएं प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगा रही हैं। चर्चा है कि नियम सभी के लिए बराबर होने चाहिए, चाहे आम व्यक्ति हो या करोड़ों का कारोबार करने वाला ठेकेदार। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करता है या फिर देर रात तक झूले चलते रहेंगे और चर्चा का बाजार इसी तरह गर्म रहेगा।









