यज्ञ भारतीय संस्कृति का मूल, यज्ञ करने से मनुष्य को अनेक आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ होते हैं प्राप्त
इमरान देशभक्त रुड़की प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(इमरान देशभक्त) रुड़की। पुरुषोत्तम मास में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन ज्योतिष गुरुकुलम में ज्योतिष गुरु और कथा व्यास आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि यज्ञ को भारतीय संस्कृति का मूल माना गया है। प्राचीन काल से ही आत्म साक्षात्कार से लेकर स्वर्ग, सुख, बंधन, मुक्ति,मन, शुद्ध आत्मबल, रिद्धि-सिद्धियों आदि के केंद्र यज्ञ ही थे।यज्ञों द्वारा मनुष्य को अनेक आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। गायत्री महामंत्र महामृत्युंजय महामंत्र दुर्गा सप्तशती के महामंत्रों के साथ-साथ जो विधिवत् हवन किया जाता है, उससे एक दिव्य वातावरण निर्मित होता है। उस दिव्य यज्ञ वातावरण में बैठने मात्र से रोगी मनुष्य निरोग हो सकते हैं चरक ऋषि ने अपने ग्रंथ चरक संहिता में लिखा है कि आरोग्य प्राप्त करने की इच्छा करने वालों को विधिवत् हवन करना चाहिए। बुद्धि को शुद्ध करने की यज्ञ में अपूर्व क्षमता है।जिन व्यक्तियों के मस्तिष्क दुर्बल है, बुद्धि मलिन है अथवा मानसिक विकृतियों से घिरे हुए हैं यदि वह यज्ञ करें, तो उससे उनकी मानसिक दुर्बलताएं शीघ्र दूर हो सकती हैं। यज्ञ से प्रसन्न देवता मनुष्य को धन, वैभव, सौभाग्य तथा सुख-साधन प्रदान करते हैं। यज्ञ करने वाला कभी दरिद्री नहीं रह सकता, कहा कि यज्ञ करने वाली स्त्री व पुरुषों की संतान बलवान, बुद्धिमान सुंदर और दीर्घ जीवी होती है। राजा दशरथ को यज्ञ द्वारा ही चार पुत्र रत्न प्राप्त हुए थे। गीता आदि शास्त्रों में इसलिए यज्ञ को आवश्यक धर्म बताया गया और कहा गया कि यज्ञ न करने वालों को लोक और परलोक कुछ भी प्राप्त नहीं होता। आयुर्वेद में भी कहा गया है कि जो यज्ञ को त्यागता है उसे परमात्मा त्याग देता है यज्ञ के द्वारा ही मनुष्य को देव योनि प्राप्त होती है और वह स्वर्ग मुक्ति का अधिकारी बनता है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में ऋषि-मुनि निरंतर यज्ञ करते थे और संसार का कल्याण होता था। यज्ञ का महान वैज्ञानिक कारण है। यज्ञ के द्वारा मनुष्य को सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।संपूर्ण वातावरण शुद्ध और पवित्र होता है देवता प्रसन्न होते हैं और वायु शुद्ध होती है।पर्यावरण संतुलन बना रहता है। संसार से कार्बन डाइऑक्साइड समाप्त होता है।सतोगुण ही मनुष्य उत्पन्न होते हैं सतोगुण वातावरण बनता है वर्षा होती है, तब खेती होती है संसार में प्रसन्नता होती है।भगवान श्रीकृष्ण तथा प्रभु श्रीराम निरंतर यज्ञकरते थे।कथा में राधा भटनागर, चित्रा गोयल, सुलक्षणा सेमवाल, अदिति सेमवाल, पूजा वर्मा, रेनू शर्मा, रितु वर्मा, वंदना, पूर्णिमा व रेखा गोयल आदि बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।









