पंच-सरपंच चुनाव में फिर कागज-कलम का दौर
मतपत्रों की प्रक्रिया से चुनावी टीम पर बढ़ेगा काम का दबाव, पूरी रात कर्मचारी चलाएंगे कलम

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(डॉ० चेतन ठठेरा) जयपुर। राजस्थान में प्रस्तावित पंचायती राज चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग के एक फैसले ने चुनावी तैयारियों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। पंच और सरपंच पदों के लिए मतदान ईवीएम की बजाय मतपत्र से कराने का फैसला पहले ही लिया जा चुका है, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव ईवीएम से कराने की व्यवस्था बताई गई है। पंचायत चुनाव में पहली बार मतदाताओं को अन्य चुनाव की तरह नाटो पर मतदान की सुविधा दी गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव राज्य निर्वाचन आयोग राजेश वर्मा द्वारा आज जारी निर्देशों के मुताबिक पंच और सरपंच के मतपत्रों से जुड़ी प्रक्रिया में हाथ से लिखने की व्यवस्था अपनाई जाएगी उन्होंने इस संबंध में सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को यह दिशा निर्देश दिए हैं। यानी जिस दौर में चुनावी प्रक्रिया तेजी से डिजिटल और मशीन आधारित हो रही है, उसी समय ग्राम स्तर के सबसे निचले चुनाव में व्यवस्था को पुराने तरीके की ओर ले जाया जा रहा है।
एक चुनाव, दो अलग-अलग व्यवस्थाएं
इस बार पंचायत चुनाव में मतदाता को अलग-अलग पदों के लिए अलग माध्यमों से मतदान करना होगा। पंच और सरपंच के लिए मतपत्र और मतपेटी, जबकि पंचायत समिति व जिला परिषद के लिए ईवीएम यह हाइब्रिड व्यवस्था चुनाव कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और प्रबंधन की चुनौती बढ़ा सकती है।
चुनाव टीम के सामने बढ़ेगी जिम्मेदारी
ईवीएम आधारित प्रक्रिया में मशीन मतदान और वोट रिकॉर्डिंग का बड़ा हिस्सा संभाल लेती है। मतपत्र व्यवस्था में मतपत्रों की तैयारी, वितरण, लेखा-जोखा, सुरक्षित रख-रखाव, मतदान के बाद सीलिंग और मतगणना जैसे कई चरणों में अतिरिक्त मानवीय सावधानी जरूरी होगी। राजस्थान पंचायती राज निर्वाचन नियमों में भी मतपत्र को प्रमाणित करने, उसका क्रमांक दर्ज करने और मतपेटी में डालने जैसी प्रक्रियाओं का प्रावधान है।
आयोग के फैसले पर उठ रहा बड़ा सवाल
सवाल यह नहीं कि मतपत्र से चुनाव कराना लोकतांत्रिक रूप से संभव है या नहीं। मतपत्र से मतदान की व्यवस्था नियमों में मौजूद है। सवाल यह है कि जब तकनीक उपलब्ध है और बड़े चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल सामान्य हो चुका है, तब ग्राम पंचायत स्तर पर फिर पारंपरिक प्रक्रिया क्यों? पारंपरिक प्रक्रिया है लेकिन मत पत्रों को हाथ से बनाना कहां तक उचित है? आयोग का यह मॉडल चुनाव को लेकर पारदर्शिता और स्थानीय परिस्थितियों के लिहाज से अलग दृष्टिकोण हो सकता है, लेकिन इसका दूसरा पहलू मानवीय श्रम और चुनावी प्रबंधन का बढ़ता बोझ है। खासकर बड़ी संख्या में पंचायतों और उम्मीदवारों वाले चुनाव में छोटी-सी प्रक्रियागत चूक भी कर्मचारियों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। यानी गांव की सरकार चुनने के लिए इस बार तकनीक और परंपरा आमने-सामने हैं ऊपर के स्तर पर ईवीएम, नीचे के स्तर पर मतपत्र और हाथ से होने वाली प्रक्रिया। अब देखना यह होगा कि आयोग की यह व्यवस्था चुनावी मैदान में कितनी सहज साबित होती है।
पूरी रात कर्मचारी चलाएंगे कलम?
पंच और सरपंच के चुनाव मत पत्र हाथ से लेकर जाने की व्यवस्था को लेकर अब मतदान दल के कर्मचारी पूरी रात हाथ से मतपत्र तैयार करेंगे अर्थात वह पूरी रात कला चलाएंगे और दूसरे दिन मतदान कराएंगे।







