बड़ी खबर: पुलिस विभाग मे तैनात दो उप निरीक्षकों के खिलाफ भ्रष्टाचार का हुआ मुकदमा दर्ज, महकमे में हलचल तेज
फिरोज अहमद समाचार सम्पादक

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(फिरोज अहमद) हरिद्वार। हरिद्वार की गंगनहर कोतवाली में दो उप निरीक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज है। तो वहीं महकमे में भी हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार रिश्वत लेने और आरोपित को गोली मारकर जेल भेजने की धमकी देने के मामले में एसएसपी के निर्देश पर एसपी देहात के नेतृत्व में जांच करते हुए आरोपों की पुष्टि होने के बाद बड़ी कार्यवाही की गई है।
जानकारी के मुताबिक बागपत जिले के निरपुड़ा निवासी निश्चय राणा की शिकायत पर तत्कालीन विवेचक मनदीप सिंह और उपनिरीक्षक बलवंत पंवार के खिलाफ कार्रवाई की गई है। शिकायतकर्ता ने दोनों पर अलग-अलग समय में रिश्वत लेने और अतिरिक्त रकम के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। खास बात यह है कि शिकायतकर्ता के मुताबिक, एसपी देहात की जांच में दोनों पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया था, इसके बावजूद मुकदमा दर्ज होने में 16 महीने लग गए।
वहीं शिकायत के अनुसार, सुषमा सैनी पत्नी बाबूराम सैनी ने पांच जुलाई 2023 को गंगनहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें निश्चय राणा के छोटे भाई निवेश राणा को आरोपित बनाया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि फरवरी 2023 की घटना को लेकर पांच महीने बाद मुकदमा दर्ज कराया गया।
तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक मनदीप सिंह ने फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर डराया-धमकाया और 3.50 लाख रुपये ले लिए। इसके बाद छह अक्टूबर 2024 को मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई। निश्चय राणा के मुताबिक, बाद में मुकदमे की दोबारा विवेचना शुरू हुई तो उपनिरीक्षक बलवंत पंवार से संपर्क हुआ।
आरोप है कि उन्होंने भी फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए पांच लाख रुपये मांगे। रकम नहीं देने पर निवेश राणा को गोली मारकर जेल भेजने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि भाई की सुरक्षा के डर से उन्होंने एक लाख रुपये दे दिए, लेकिन इसके बाद चार लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की जाने लगी। रकम देने में असमर्थता जताने पर विवेचना रोकने और झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देने का भी आरोप है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने एक जुलाई 2025 को तत्कालीन एसएसपी को ऑडियो-वीडियो और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराए थे। इसके बाद एसपी देहात से जांच कराई गई। शिकायत के मुताबिक, जांच आख्या में दोनों उपनिरीक्षकों को दोषी पाया गया। 18 अक्टूबर 2026 को दी गई शिकायत के साथ जांच आख्या की छायाप्रति भी संलग्न की गई थी।
वहीं भ्रष्टाचार के विरुद्ध हरिद्वार पुलिस का सख्त संदेश कानून से ऊपर कोई नहीं है।









