हरिद्वार

परंपरागत खेती छोड़ बागवानी में लिखी सफलता की नई इबारत, मंगलौर के दो भाइयों ने हासिल की आत्मनिर्भरता

फिरोज अहमद समाचार सम्पादक

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(फिरोज अहमद) हरिद्वार। राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं का लाभ लेकर जनपद हरिद्वार के मंगलौर निवासी दो प्रगतिशील किसानों ने बागवानी एवं औद्यानिकी के क्षेत्र में सफलता की नई मिसाल कायम की है। मोहम्मद माजिद हुसैन एवं मोहम्मद वाजिद हुसैन ने कड़ी मेहनत और आधुनिक खेती तकनीकों के माध्यम से न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। दोनों भाई करीब 35 बीघा भूमि पर बागवानी एवं औद्यानिकी खेती कर रहे हैं। इनमें 20 बीघा भूमि पर स्ट्रॉबेरी और मालबेरी की खेती की जा रही है, जबकि शेष भूमि पर तुरई, करेला, टमाटर, बैंगन, धनिया, मिर्च और खीरा जैसी सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। किसानों के अनुसार स्ट्रॉबेरी की खेती से प्रतिवर्ष 5 से 10 लाख रुपये तक का कारोबार हो रहा है, जबकि कुल उत्पादन से लगभग 30 से 35 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है। मोहम्मद माजिद हुसैन ने बताया कि पहले उनका परिवार पारंपरिक रूप से मक्का और गन्ने की खेती करता था, लेकिन उसमें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार की योजनाओं से प्रेरित होकर अपने भाई मोहम्मद वाजिद हुसैन के साथ बागवानी एवं औद्यानिकी खेती की ओर कदम बढ़ाया। आज उनकी मेहनत रंग ला रही है और उनका व्यवसाय लगातार आगे बढ़ रहा है। इस खेती से आसपास के 20 से 25 ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है, जिनमें लगभग 15 महिलाएं शामिल हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के साथ-साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी बढ़ी है। किसानों ने बताया कि उद्यान विभाग द्वारा वर्ष 2024 में 500 वर्ग मीटर पालीहाउस स्थापना के लिए 50 प्रतिशत राज सहायता प्रदान की गई थी। इसके अलावा वर्ष 2025-26 में स्ट्रॉबेरी खेती को बढ़ावा देने के लिए भी 50 प्रतिशत सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। विभाग की ओर से कद्दू वर्गीय फसलों के लिए जीआई सपोर्ट सिस्टम तथा फसलों को ओलावृष्टि और नमी संरक्षण से बचाने के लिए भी सहायता प्रदान की गई है। दोनों किसानों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिला प्रशासन और उद्यान विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं के सहयोग से ही वे आधुनिक खेती अपनाकर आत्मनिर्भर बनने में सफल हुए हैं। यह सफलता अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।

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