खुलासा: Swift की डिक्की से खुला डिजिटल ठगी का ‘मगध कनेक्शन’
2.75 करोड़ की मनी ट्रेल ने खोली साइबर नेटवर्क की परतें

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। साइबर अपराध अब किसी एक शहर या राज्य की सीमाओं में बंधा अपराध नहीं रह गया है। बैंक खातों, सिम कार्ड, एटीएम और डिजिटल भुगतान के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में फैले इस संगठित नेटवर्क की एक कड़ी हरिद्वार में उस वक्त सामने आई, जब श्यामपुर पुलिस ने एक Swift कार की सामान्य चेकिंग को बड़ी साइबर कार्रवाई में बदल दिया। पुलिस ने कार सवार पांच कथित साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करते हुए 35 एटीएम कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 17 सिम कार्ड, 18 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और ₹37,500 नकद बरामद किए हैं। प्रारंभिक डिजिटल विश्लेषण में ₹2.75 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन के सुराग मिलने से जांच का दायरा और बड़ा हो गया है।
उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय की ओर से चिन्हित साइबर क्राइम हॉटस्पॉट और संभावित हॉटस्पॉट के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के निर्देशन में श्यामपुर पुलिस क्षेत्र में संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की निगरानी कर रही थी। इसी दौरान सज्जनपुर पीली क्षेत्र में मिली मुखबिर की सूचना ने पुलिस को एक सफेद Swift कार तक पहुंचाया। रसियाबड़ सिंगल लाइन प्वाइंट पर घेराबंदी कर UK-08AF-0560 नंबर की कार को रोका गया तो तलाशी में साइबर फ्रॉड से जुड़ा पूरा सामान बरामद हुआ।
पुलिस के हाथ लगे 14 बैंक पासबुक और 35 एटीएम कार्ड किसी सामान्य बैंकिंग गतिविधि के बजाय एक बड़े नेटवर्क की ओर संकेत कर रहे थे। बरामद दस्तावेजों में Central Bank of India, Indian Overseas Bank, SBI, UCO Bank, Bank of Maharashtra, Indian Bank और The Nainital Bank समेत कई बैंकों के खाते मिले हैं। एटीएम कार्डों में भी देश के अलग-अलग प्रमुख बैंकों के कार्ड शामिल हैं।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में बरामद मोबाइल फोन की WhatsApp चैट में बैंक खाता नंबर, खाताधारकों के नाम, QR Code और पैसों के लेन-देन से संबंधित बातचीत के साक्ष्य मिले हैं। मोबाइल गैलरी में बैंक पासबुक और खातों से जुड़े दस्तावेजों की तस्वीरें भी मिली हैं। यही डिजिटल सामग्री अब पुलिस के लिए उस मनी ट्रेल को जोड़ने का आधार बनी है, जिसकी शुरुआती रकम ₹2.75 करोड़ से अधिक बताई जा रही है।
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि कथित तौर पर स्थानीय लोगों से बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम हासिल किए जाते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया जाता था। रकम आने के बाद उसे UPI के जरिए दूसरे खातों में भेजा जाता और फिर ATM या CDM से नकदी निकाल ली जाती थी। निकाली गई रकम को नेटवर्क में शामिल लोगों के बीच कमीशन के आधार पर बांटे जाने की बात भी सामने आई है।
इस तरह खाता उपलब्ध कराने वाले से लेकर डिजिटल रकम को नकदी में बदलने वाले तक, नेटवर्क में अलग-अलग भूमिकाएं तय होने की आशंका है। पुलिस अब इस पूरी कड़ी के पीछे मौजूद मुख्य संचालकों तक पहुंचने के लिए बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है।
गिरफ्तार आरोपियों में अधिकांश बिहार के नालंदा और नवादा जिले के निवासी हैं। पुलिस पूछताछ में बिहार क्षेत्र से जुड़े कुछ अन्य व्यक्तियों द्वारा बैंक खाते उपलब्ध कराने और साइबर ठगी की रकम से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इनकी वास्तविक भूमिका की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होगी।
पुलिस ने कृष्णा पाण्डे (24), नालंदा; निरंजन कुमार (24), नवादा, सन्नी (21), हरिद्वार; चन्द्रमणि कुमार (24), नवादा और चन्दन पाण्डे (20), हरिद्वार को गिरफ्तार किया है।
मामले का बुधवार को खुलासा करते हुए एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह ने कहा, “साइबर अपराधी कहीं भी छिपे हों, हरिद्वार पुलिस उनके नेटवर्क तक पहुंचकर उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाएगी। हमारी एक बहुत बड़ी टीम इसी पर काम कर रही है।”
आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(4), 317(2), 3(5) तथा IT Act की धारा 66C और 66D के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब बैंक खातों की विस्तृत स्टेटमेंट, KYC, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट के जरिए संदिग्ध रकम की वास्तविक मात्रा और पूरी मनी ट्रेल का निर्धारण करेगी।
श्यामपुर पुलिस की इस कार्रवाई को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि साइबर ठगी के बदलते भूगोल में जामताड़ा जैसे चर्चित ठिकानों के साथ बिहार के नालंदा-नवादा क्षेत्र से जुड़े नए नेटवर्क के संकेत सामने आए हैं। एक Swift कार की चेकिंग से शुरू हुई यह कार्रवाई अब उन डिजिटल गलियों तक पहुंच चुकी है, जहां कागज पर बैंक खाते अलग-अलग लोगों के नाम हैं, लेकिन उनके पीछे चलने वाला खेल एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा होने का संदेह पैदा करता है।









