रुड़की

नारकोटिक दवाओं की अवैध बिक्री किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं: वरिष्ठ औषधि निरीक्षक अनीता भारती

इमरान देशभक्त/मोहम्मद मुस्लिम

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(इमरान देशभक्त/मोहम्मद मुस्लिम) रुड़की। जनपद में नारकोटिक दवाओं के दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त तेवर अपनाते हुए विशेष जांच अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में गुरुवार को चंद्रपुरी क्षेत्र स्थित पल्स मेडिकल स्टोर पर औचक छापेमारी की गई। कार्रवाई का नेतृत्व वरिष्ठ औषधि निरीक्षक अनीता भारती ने गंग नहर कोतवाली पुलिस टीम के साथ संयुक्त रूप से किया।

अभियान के दौरान विभागीय टीम ने मेडिकल स्टोर के स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री बिल, मेंटेनेंस रिकॉर्ड तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों की गहनता से जांच की। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि नारकोटिक श्रेणी की दवाओं का भंडारण एवं वितरण निर्धारित नियमों के अनुरूप ही किया जा रहा है या नहीं।

वरिष्ठ ड्रग्स इंस्पेक्टर अनीता भारती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अपर स्वास्थ्य सचिव/अपर आयुक्त के निर्देश पर जनपद के सभी मेडिकल स्टोरों की सघन जांच की जा रही है। विभाग को लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि कुछ स्थानों पर नारकोटिक दवाएं बिना विधिवत अभिलेखों और पंजीकृत चिकित्सक की लिखित पर्ची के बेची जा रही हैं। इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि नियमानुसार नारकोटिक दवाएं केवल पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही वितरित की जा सकती हैं तथा उनके स्टॉक, बिक्री और भंडारण का पूर्ण एवं अद्यतन रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। यदि कोई संचालक आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने में असमर्थ पाया गया तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। गंभीर अनियमितता पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त करने तक की कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

अधिकारियों ने यह भी चेताया कि जांच से बचने के उद्देश्य से दुकान बंद रखने वाले संचालकों को चिन्हित किया जा रहा है और ऐसे मामलों में भी नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। अभियान के दौरान ड्रग विभाग के अधिकारी हरीश कुमार सहित अन्य कर्मचारी एवं गंग नहर कोतवाली पुलिस बल मौजूद रहा।

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनहित एवं युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह विशेष अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। विभाग का उद्देश्य न केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है, बल्कि दवा व्यवसाय में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है।

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