गुरुकुल कांगड़ी में आर्य वीर-आर्या वीरांगना शिविर का भव्य समापन, शौर्य और वैदिक संस्कारों का दिया संदेश
फिरोज अहमद समाचार सम्पादक

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(फिरोज अहमद) हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में सप्ताहभर चले आर्य वीर व आर्या वीरांगना प्रशिक्षण शिविर का भव्य समापन आर्य दीक्षांत समारोह के साथ हुआ। समारोह में वक्ताओं ने युवाओं से वैदिक संस्कृति, राष्ट्र सेवा और चरित्र निर्माण को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। वहीं प्रशिक्षुओं ने नानचाक, तलवार, फरसा, दंड संचालन तथा आकर्षक पिरामिड और स्तूप निर्माण का शानदार प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया समारोह का शुभारंभ ध्वजारोहण वं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सार्वदेशिक आर्य वीर दल, दिल्ली के शिविर प्रशिक्षण व्यवस्थापक बृहस्पति आर्य ने कहा कि व्यक्ति का जीवन सरल, सात्विक और सहयोग की भावना से परिपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मातृवान, पितृवान और आचार्यवान संतान ही राष्ट्र की सुरक्षा और समृद्धि की आधारशिला होती है।
वैदिक विद्वान डॉ. योगेश भारद्वाज ने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव व्यक्ति में संवेदनशीलता विकसित करता है। उन्होंने युवाओं से आर्य समाज और गुरुकुल की विचारधारा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. एल.पी. पुरोहित ने आर्य समाज को जनक्रांति का संवाहक बताते हुए कहा कि आज युवाओं की सोचने समझने की क्षमता सीमित होती जा रही है, जिसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी एक कारण बन रहा है। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण शिविरों के नियमित आयोजन पर बल दिया।
उत्तराखंड आर्य समाज के विचारक डॉ. श्याम सिंह ने कहा कि आर्य वीर और आर्या वीरांगनाएं समाज की नई शक्ति हैं। उन्होंने परिवार और रिश्तों को मजबूत करने, शस्त्र के साथ शास्त्र की शिक्षा तथा भारतीय परंपराओं को अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि ललाठी राष्ट्र की ढाल है। यदि युवाओं का शौर्य सो गया तो राष्ट्र की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने युवाओं से वैदिक ज्ञान परंपरा की रक्षा और राष्ट्र सेवा के लिए आगे आने का आह्वान किया। शिविर के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त आर्य वीर एवं आर्या वीरांगनाओं को अतिथियों ने प्रशस्ति पत्र एवं वैदिक साहित्य भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन वं संयोजन डॉ. संदीप वेदालंकार, डॉ. अंकित एवं डॉ. मनोज ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, आर्य समाज के पदाधिकारी, प्रशिक्षक व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।









