हरिद्वार

शांतिकुंज में तीन दिवसीय ट्रस्ट मंडल कार्यशाला का समापन

जन्मशताब्दी वर्ष में मिशन विस्तार का संकल्प लेकर लौटे प्रज्ञा संस्थानों के ट्रस्टी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(नीटू कुमार) हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित तीन दिवसीय ट्रस्ट मंडल कार्यशाला प्रेरणा, चिंतन और संकल्प का संगम बनी। देश के विभिन्न प्रांतों में शांतिकुंज की शाखा के रूप में संचालित प्रज्ञा संस्थानों के ट्रस्टियों एवं कार्यकर्ताओं ने मिशन के कार्यों को गति देने, संगठन को सशक्त बनाने तथा युगनिर्माण अभियान को व्यापक बनाने पर गहन मंथन किया।

कार्यशाला में अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के संदर्भ में चल रहे अभियानों को गति देने पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने जन-जन तक पहुंचाने तथा युवा, महिला और समाज के विभिन्न वर्गों को मिशन के रचनात्मक कार्यों से जोड़ने का संकल्प लिया।

विदाई से पूर्व प्रतिभागियों ने संस्था की अधिाष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी से भेंट कर उनका मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि युग निर्माण मिशन का कार्य संस्थाओं और गतिविधियों के विस्तार के साथ ही यह विचारों, संस्कारों और सेवा भाव के विस्तार का अभियान है। उन्होंने ट्रस्टियों से अपने-अपने क्षेत्रों में सेवा एवं साधना को आधार बनाकर अधिक से अधिक लोगों को रचनात्मक कार्यों से जोड़ने हेतु प्रेरित किया।

वहीं प्रतिभागियों के साथ भेंट-परामर्श के दौरान देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डा. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि जन्मशताब्दी वर्ष युगऋषि पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिशा में विभिन्न रचनात्मक एवं जनोपयोगी कार्यक्रमों के माध्यम से विचार-विस्तार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

समापन अवसर पर विषय विशषज्ञों ने कहा कि ट्रस्टी अर्थात विश्वासपात्र। यह समय विश्वास के साथ गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि सेवा और साधना के समन्वय से किया गया कार्य समाज में स्थायी परिवर्तन ला सकता है।

कार्यशाला में शामिल ट्रस्टियों ने शांतिकुंज की रचनात्मक गतिविधियों से प्रेरणा लेते हुए अपने क्षेत्रों में सेवा कार्यों के विस्तार की प्रतिबद्धता जताई। प्रेरणा से संकल्प और संकल्प से सेवा की ओर बढ़ते कदमों के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।

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