हरिद्वार

35 लाख लीटर से अधिक पानी निकासी का दावा, प्रॉपर्टी डीलरों की मनमानी और HRDA की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। बहादराबाद क्षेत्र के सुमननगर में भारी वर्षा के बाद उत्पन्न जलभराव की गंभीर समस्या से निपटने के लिए जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशानुसार जिला आपदा प्रबंधन विभाग सहित विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमें मौके पर राहत एवं जल निकासी कार्य में जुटी हुई हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा जलभराव की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की गई। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र, कानूनगो, तहसील प्रशासन, सिंचाई विभाग, पंचायत विभाग, आरकेओ तथा अन्य संबंधित विभागों की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद हैं। अधिकारियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर जल निकासी व्यवस्था को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से तीन अलग-अलग माध्यमों से जल निकासी का कार्य किया जा रहा है। सक्शन मशीनों, पंप सेटों तथा जेसीबी मशीनों की सहायता से पानी निकालने के साथ ही नालियों की खुदाई और सफाई कर जल निकासी के रास्ते खोले जा रहे हैं। सुमननगर की गली संख्या 3 और 4 में विशेष अभियान चलाकर पंप सेट लगाए गए हैं। प्रशासन के अनुसार अब तक पंप सेटों के माध्यम से लगभग 35 लाख लीटर पानी की निकासी की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त शिविर के माध्यम से करीब 15 लाख लीटर तथा नमामि गंगे की रुड़की शिविर टीम द्वारा भी लगभग 15 लाख लीटर पानी की निकासी की गई है। वर्तमान में भी राहत एवं जल निकासी कार्य लगातार जारी है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जलभराव की समस्या पूरी तरह समाप्त होने तक राहत एवं जल निकासी अभियान में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित नागरिकों को शीघ्र राहत पहुंचाना प्राथमिकता है और स्थिति के पूर्ण सामान्य होने तक कार्रवाई जारी रहेगी। लेकिन इस पूरी कार्रवाई के बीच एक बड़ा और गंभीर सवाल भी सुमननगर की जनता के सामने खड़ा है। आखिर हर वर्ष या बारिश के दौरान जलभराव जैसी स्थिति पैदा होने के पीछे जिम्मेदार कौन है? भले ही जिला प्रशासन ने इस बार जलभराव की समस्या को गंभीरता से लिया हो और राहत कार्य युद्धस्तर पर चल रहा हो, लेकिन उस सच्चाई से भी मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि क्षेत्र में अनियोजित और कथित रूप से नियमों की अनदेखी कर विकसित की गई कॉलोनियों ने स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ाई हैं। स्थानीय स्तर पर लगातार यह चर्चा सामने आती रही है कि कुछ प्रॉपर्टी डीलरों ने अपने व्यावसायिक हितों के लिए जमीनों पर कॉलोनियां विकसित कर दीं, लेकिन वहां रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कागजों और प्रचार तक ही सीमित रह गए। कॉलोनी खरीदने वाले लोगों को सड़क, नाली, जल निकासी और अन्य सुविधाओं के सपने दिखाए गए, लेकिन बारिश आते ही जलभराव की समस्या ने इन दावों की हकीकत उजागर कर दी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी क्षेत्र में कॉलोनी विकसित की जा रही है तो उसकी जल निकासी व्यवस्था, सड़क, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी किसकी है? क्या बिना समुचित ड्रेनेज व्यवस्था के कॉलोनियों का विकास किया गया? और यदि ऐसा हुआ तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? सुमननगर में लगातार बढ़ते निर्माण और कॉलोनियों के विकास को लेकर अब HRDA की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में तेजी से हो रहे अनियोजित विकास और कथित अवैध निर्माणों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसका खामियाजा आज आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। बारिश का पानी निकालने के लिए प्रशासन को लाखों लीटर पानी पंपों के माध्यम से बाहर निकालना पड़ रहा है, लेकिन सवाल केवल पानी निकालने तक सीमित नहीं होना चाहिए। आवश्यकता इस बात की भी है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसके लिए जलभराव के मूल कारणों की जांच की जाए। जिला प्रशासन की तत्काल राहत कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन अब जरूरत उन कारणों तक पहुंचने की है जिनकी वजह से सुमननगर के लोगों को बार-बार जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जनता की मांग है कि संबंधित विभाग सुमननगर में विकसित कॉलोनियों की जांच कराएं और यह स्पष्ट करें कि किन कॉलोनियों में मानकों के अनुरूप जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों और विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। पानी निकालना तत्काल राहत है, लेकिन जलभराव की जड़ तक पहुंचकर उसका स्थायी समाधान करना ही प्रशासन और संबंधित विकास विभागों की असली परीक्षा है।

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