हरिद्वार

किशोर न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने पर मंथन, बाल हितों की सुरक्षा के लिए समन्वित प्रयासों पर जोर

मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के क्रियान्वयन के एक दशक की समीक्षा एवं भविष्य की दिशा तय करने के उद्देश्य से रविवार को हयात प्लेस, बहादराबाद, हरिद्वार में राज्य स्तरीय हितधारक परामर्श का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति द्वारा महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, उत्तराखण्ड सरकार के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं उपस्थित न्यायाधीशों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर मातृ आँचल कन्या विद्यालय, राजागार्डन, हरिद्वार की छात्राओं तथा राजकीय बाल देखरेख गृह, रोशनाबाद की बालिकाओं ने भावपूर्ण सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम में बच्चों को न्यायाधीशों की धर्मपत्नीगण द्वारा उपहार प्रदान कर सम्मानित किया गया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उन्होंने सभी हितधारकों से किशोर न्याय अधिनियम के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने के लिए व्यावहारिक एवं क्रियान्वयन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने अधिनियम के दस वर्षों की यात्रा की समीक्षा करते हुए बाल-केंद्रित न्याय व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विधि के साथ संघर्षरत अथवा देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाला प्रत्येक बच्चा सबसे पहले एक बच्चा है और उसे दंड के बजाय पुनर्वास तथा अलगाव के बजाय समाज में पुनः एकीकरण का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय को कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण बताया। न्यायमूर्ति आलोक महरा ने कहा कि न्याय में होने वाला विलंब बच्चे के जीवन और भविष्य को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने समयबद्ध और बाल-केंद्रित न्यायिक प्रक्रिया को आवश्यक बताया। वहीं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए उत्तराखण्ड में बाल संरक्षण से जुड़ी सभी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के विभिन्न रजिस्ट्रार, निदेशक उजाला, सचिव विधि एवं विधिक परामर्शदाता, सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष, सभी जनपदों के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पॉक्सो एवं एफटीएससी न्यायालयों के न्यायाधीश, किशोर न्याय बोर्डों के प्रधान मजिस्ट्रेट तथा पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण एवं पंचायती राज विभागों के वरिष्ठ अधिकारी सहित 180 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। दिनभर चले परामर्श कार्यक्रम में पांच तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें दत्तक ग्रहण, देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे, विधि के साथ संघर्षरत बच्चे, प्रारम्भिक मूल्यांकन तथा किशोर न्याय अधिनियम-2015 के समग्र अवलोकन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। तकनीकी सत्रों में श्री प्रदीप पंत, निदेशक उजाला, चंद्रेश यादव, सचिव महिला कल्याण एवं बाल विकास, सुश्री भावना सक्सेना, सीईओ कारा, भारत सरकार, सुश्री निवेदिता कुकरेती, आईजी कुमाऊं, राजीव भल्ला, अनाथ शिशु पालन ट्रस्ट, संगीता गौड़, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन, सुश्री स्नेहा सिंह, एडवोकेट, विक्रम श्रीवास्तव, एडवोकेट एवं फाउंडर इंडिपेंडेंट थॉट, विजय दीक्षित, सुपरिंटेंडेंट स्पेशल होम्स रोशनाबाद तथा रघुवरदत्त तिवारी, पूर्व चेयरपर्सन एचडब्ल्यूसी देहरादून ने विशेषज्ञ एवं वक्ता के रूप में योगदान दिया। उद्घाटन सत्र का समापन उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल श्री योगेश कुमार गुप्ता के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्रत्येक बच्चे के लिए सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और पोषणकारी वातावरण तैयार करने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला न्यायाधीश हरिद्वार श्री नरेन्द्र दत्त, किशोर न्याय समिति उच्च न्यायालय नैनीताल के रजिस्ट्रार/सचिव श्री विक्रम तथा जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित के नेतृत्व में जिला न्यायालय एवं जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण रही।

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