देहरादून

चुनावी दौर शुरू: राजनीतिक खिलाड़ियों का मौसम की तरह दल बदलने का खेल हुआ शुरू

राजनेतिक मंचों से खुद को जनता का सेवक होने का भरोसा दिलाने वाले पल भर में बदल रहे दल

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश कुमार) देहरादून। भारत की राजनीति भी मौसम की तरह से होती जा रही है, जहां आपनी अपनी राजनेतिक पार्टी में एक जिम्मेदार पद पर रहने वाले बड़े बड़े मंत्रियों से लेकर जन प्रतिनिधि जनता के सामने खुद को जनता का सेवक बताने वाले ऐसे राजनीतिक खिलाड़ी जनता को भरोसा दिलाते हुए जमकर गुमराह करने का खेल खेलते हैं। जिससे आमजन को खुद समझ नहीं आता कि यह कैसा खेल खेला जा रहा है। वैसे भी यह कोई नई बात नहीं है कि इस देश के बड़े बड़े दिग्गज नेता चुनावी दौर से पहले अपनी पार्टी में एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए बड़े बड़े मंचों से अपनी पार्टी की उपलब्धियां गिनाते नहीं थकते, तो वहीं अपनी विपक्षी पार्टियों की कमियों को भी जनता के सामने उजागर करते हुए खूब वाहवाही लूटने में लगे रहते हैं, जो शहर में चर्चा का विषय बना हुआ होता है, लेकिन जैसे जैसे चुनावी दौर नजदीक आता जा रहा है वैसे वैसे ही ऐसे जिम्मेदार राजनीतिक खिलाड़ी मौसम की तरह दल बदलने का खेल खेलना शुरू कर देते हैं। इससे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ऐसे जिम्मेदार पदों पर रहकर जिस पार्टी की नाव में सवार होकर खुद की पहचान बनाने वाले अपने स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी की नाव में सवार होकर नया सफर तय कर जनता को गुमराह करने का खूब जमकर खेल खेलते हैं, भला ऐसे राजनितिक नेता विकास कार्यों के प्रति क्या ज़िम्मेदारी समझते होंगे जो चुनावी मैदान में हार जीत होना स्वाभाविक है, लेकिन एक ईमानदार और जिम्मेदार राजनेता को अपनी पार्टी के प्रति समर्पित होकर देश की सेवा करनी चाहिए ना कि मौका देखकर अपनी पार्टी से अन्य पार्टी में शामिल होकर अपने समर्थकों का व जनता के साथ मजाक उड़ाया जाए। वहीं चुनावी दौर शुरू होते ही राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवार और उनके समर्थक अपनी पार्टी के झंडे लिए गली मोहल्लों में खूब प्रचार करते दिखाई देते हैं, हद तो तब हो जाती है जब उम्मीदवार के पक्ष में समर्थक जनता के सामने मतदान करने के लिए मतदाता को विश्वास में लेते हैं। लेकिन समय के साथ ही वही उम्मीदवार कुछ घंटों में अपनी पार्टी छोड़कर अन्य पार्टी में शामिल होकर अपने समर्थकों को जमकर गुमराह करने का खेल खेलते हैं। ऐसे राजनीतिक नेताओं के दल बदल से ईमानदार राजनेताओं की छवि को भी धूमिल करने का खेल खेला जा रहा है।

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