हरिद्वार

सुमन नगर से सलेमपुर, दादूपुर गोविंदपुर तक अवैध कॉलोनियों का जबरदस्त मक्कड़ जाल, संभले नहीं तो मेहनत की कमाई फंसने का खतरा, चर्चा ही चर्चा

मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। सुमन नगर, सलेमपुर, दादूपुर गोविंदपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में कथित अवैध कॉलोनियों के विकास को लेकर चर्चाओं का गर्माहट बना हुआ है। चर्चा है कि आखिर हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है और यदि कहीं नियमों के विपरीत प्लॉटिंग हो रही है, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। स्थानीय स्तर पर उठ रही चर्चाओं के बीच सबसे बड़ी चिंता उन आम लोगों की है, जो जीवनभर की मेहनत की कमाई जोड़कर अपने परिवार के लिए एक छोटा-सा मकान या प्लॉट खरीदने का सपना देखते हैं। यदि कोई कॉलोनी आवश्यक स्वीकृतियों के बिना विकसित की जा रही है और लोगों को पूरी जानकारी दिए बिना प्लॉट बेचे जा रहे हैं, तो इसका सीधा नुकसान खरीदारों को उठाना पड़ सकता है।

कॉलोनी विकसित होने के बाद क्यों जागता है विभाग
क्षेत्र में कथित अवैध प्लॉटिंग को लेकर यह चर्चा भी उठ रही है कि संबंधित विभाग समय रहते निर्माण और भूमि-विकास की जांच क्यों नहीं करता। यदि किसी स्थान पर नियमों के विरुद्ध कॉलोनी विकसित हो रही है, तो शुरुआती चरण में ही नोटिस, जांच और नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है। चर्चा: लोगों के बीच यह आशंका भी है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि पहले कॉलोनियों का विस्तार होता रहे और बाद में कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता पूरी कर दी जाए। हालांकि, इन आशंकाओं की पुष्टि संबंधित अभिलेखों, स्वीकृतियों और विभागीय जांच से ही हो सकती है। इसलिए एचआरडीए को स्थिति स्पष्ट करते हुए संबंधित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।

पीला पंजा चला तो किसका उजड़ेगा आशियाना
यदि किसी कॉलोनी में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो भविष्य में ध्वस्तीकरण या अन्य वैधानिक कार्रवाई की आशंका से वहां प्लॉट खरीदने वाले परिवार चिंतित हो सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि नियमों के विपरीत कॉलोनी विकसित करने वालों और बिना पर्याप्त जांच के प्लॉट खरीदने वाले आम नागरिकों के हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। कार्रवाई का उद्देश्य केवल अवैध निर्माण हटाना नहीं, बल्कि ऐसी स्थिति बनने से पहले रोकथाम करना भी होना चाहिए, ताकि किसी परिवार की वर्षों की बचत और आशियाना संकट में न पड़े।

प्लॉटिंग करने वालों की जिम्मेदारी भी तय हो
प्रशासन को चाहिए कि संबंधित क्षेत्रों में भूमि के उपयोग, कॉलोनी के लेआउट, स्वीकृतियों और भूखंडों की बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाए। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, आम लोगों को यह जानकारी उपलब्ध कराई जाए कि कौन-सी कॉलोनी स्वीकृत है और किन स्थानों पर प्लॉट खरीदने से पहले अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

क्षेत्र में शासन-प्रशासन से उठती मांग
अब जरूरत है कि एचआरडीए और जिला प्रशासन सुमन नगर, सलेमपुर, दादूपुर गोविंदपुर तथा आसपास के क्षेत्रों में निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करें। यदि कहीं अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही है, तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय हो और समय रहते कार्रवाई की जाए। आखिर सवाल यही है क्या आम आदमी को अपनी मेहनत की कमाई से खरीदे गए प्लॉट और मकान की सुरक्षा का भरोसा मिल पाएगा, या फिर नियमों की अनदेखी का खामियाजा उसे ही भुगतना पड़ेगा।

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