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रेलवे अंडरपास बना तालाब, सुविधा के बजाय मुसीबत: बारिश में रास्ता बंद, किसानों और राहगीरों की बढ़ी परेशानी

मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। रेलवे विभाग द्वारा पूर्व में रेलवे फाटकों पर लगने वाले जाम और लोगों के समय की बचत के उद्देश्य से अंडरपासों का निर्माण कराया गया था। इन अंडरपासों का मकसद था कि रेलवे फाटक बंद होने के दौरान आमजन, ग्रामीणों और किसानों को परेशानी न उठानी पड़े तथा वह सुरक्षित और सुगम तरीके से आवागमन कर सकें। लेकिन वर्तमान स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। धनपुरा से ज्वालापुर मार्ग के बीच बड़ी इक्कड़ की ओर जाने वाले मार्ग पर बने रेलवे अंडरपास में बारिश के बाद भारी मात्रा में पानी जमा हो चुका है। स्थिति यह है कि अंडरपास तालाब में तब्दील नजर आ रहा है। पानी इतना अधिक भर गया है कि लोगों का आवागमन तक प्रभावित हो गया है। किसानों को खेतों तक पहुंचने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अंडरपास का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि रेलवे फाटक बंद होने के कारण लोगों का समय बर्बाद न हो और आवागमन सुचारु बना रहे। लेकिन यदि बारिश के दौरान यही अंडरपास पानी से भरकर रास्ता बंद कर दें तो फिर इस निर्माण का वास्तविक लाभ आमजन को किस तरह मिलेगा, यह बड़ा सवाल है। अंडरपास में पानी भरने के बाद रेलवे विभाग की ओर से वहां एक कर्मचारी की तैनाती की गई है। साथ ही लोगों को सावधान करने के लिए बोर्ड भी लगाया गया है, जिस पर लिखा है ठहरिए। और बस का एक बड़ा डंडा भी एक से दूसरी और बंदा है। और बोर्ड व बैनर पर लिखा है। जिन पर पानी भरने के कारण रास्ता बंद होने की सूचना दी गई है। ओर कोई दूसरा वैकल्पिक मार्ग उपयोग करने की सलाह दी गई है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या अंडरपास का निर्माण केवल रास्ता बनाने के लिए किया गया था या बरसात के दिनों में जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था भी योजना का हिस्सा थी? यदि जलभराव की समस्या पहले से संभावित थी तो इसके स्थायी समाधान की व्यवस्था निर्माण के समय ही क्यों नहीं की गई? रेलवे द्वारा अंडरपास निर्माण पर बड़ी धनराशि खर्च की गई है। ऐसे में आमजन का सवाल स्वाभाविक है कि जिस परियोजना का उद्देश्य सुविधा देना था, वह बारिश के दिनों में परेशानी का कारण क्यों बन रही है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में अंडरपास का उपयोग किसानों द्वारा खेतों तक पहुंचने के लिए किया जाता है। रास्ता बंद होने से उन्हें वैकल्पिक मार्ग तलाशना पड़ता है, जिससे समय और संसाधन दोनों की अतिरिक्त खपत होती है। स्थानीय लोगों ने रेलवे विभाग से मांग की है कि अंडरपास में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कराया जाए। केवल पानी निकलवाने या रास्ता बंद होने का बोर्ड लगाने के बजाय ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे बारिश के दौरान भी अंडरपास से आवागमन बाधित न हो।अब देखने वाली बात यह होगी कि रेलवे विभाग इस समस्या को अस्थायी मानकर हर बारिश में रास्ता बंद करने तक सीमित रहता है या अंडरपास की जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त कराकर वास्तव में इसे आमजन और किसानों के लिए सुगम एवं सुरक्षित आवागमन का माध्यम बनाता है। जनता का सवाल साफ है—जब सुविधा के लिए अंडरपास बनाया गया था, तो बारिश आते ही वही अंडरपास परेशानी का सबब क्यों बन रहा है?

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