देहरादून

जलभराव वाले क्षेत्रों में पहुंचे गन्ना विभाग के अधिकारी, किसानों को दिए जल निकासी के सुझाव

राजेश पसरीचा देहरादून प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश पसरीचा) ऊधमसिंह नगर। लगातार हो रही बारिश के बीच गन्ना विकास परिषद काशीपुर के अधिकारियों ने परिक्षेत्र के विभिन्न ग्रामों में जल प्लावित क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान एससीडीआई काशीपुर बी.के. चौधरी ने खेतों में जलभराव की स्थिति का जायजा लेते हुए किसानों को शीघ्र जल निकासी की व्यवस्था करने के सुझाव दिए।

एससीडीआई बी.के चौधरी ने बताया कि लगातार वर्षा के कारण कुछ क्षेत्रों में खेतों में पानी भर गया है। यदि खेतों में लंबे समय तक जलभराव बना रहता है तो इससे फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। उन्होंने किसानों से जलभराव वाले खेतों से जल्द से जल्द पानी निकालने तथा आवश्यक प्रबंधन करने की अपील की। अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश क्षेत्रों में जल निकासी हो चुकी है।

जलभराव वाले क्षेत्रों के निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने परिक्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों का भी जायजा लिया। इस दौरान नवीनतम प्रजातियों की स्थापित पौधशालाओं का निरीक्षण किया गया और उनकी स्थिति की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने योजनाओं से लाभान्वित किसानों से सीधे बातचीत कर योजनाओं के संबंध में फीडबैक भी लिया। किसानों द्वारा विभागीय योजनाओं पर संतुष्टि व्यक्त किए जाने पर अधिकारियों ने प्रसन्नता जाहिर की।

निरीक्षण के दौरान किसानों से संवाद कर उन्हें गन्ना विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने किसानों से शरदकालीन गन्ने की बुवाई बढ़ाने तथा गन्ना आपूर्ति में बढ़ोतरी के लिए आवश्यक सुझाव भी लिए। साथ ही किसानों को शीघ्र मृदा परीक्षण कराने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि मिट्टी की जांच के आधार पर फसल के लिए आवश्यक पोषक तत्वों और उर्वरकों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है।

सर्किल प्रभारी राजेश कुमार ने किसानों को अनुदान पर उपलब्ध जैविक खाद, उर्वरक एवं कीटनाशकों के संबंध में जानकारी देकर उन्हें विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने के लिए जागरूक किया। निरीक्षण के दौरान ब्लॉक प्रभारी/गन्ना विकास निरीक्षक वीरेंद्र कुमार मौर्य, राजेश कुमार राजपूत, मो. शाकिर, भुवन चंद्र भट्ट सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने किसानों से कहा कि विभागीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और गन्ने की बेहतर पैदावार के लिए वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं।

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