सहारनपुर की ऐतिहासिक मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर मौसम अली ने उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
राष्ट्रपति के नाम से भेजा ज्ञापन, कानूनी प्रक्रिया और छुट्टी वाले दिन बुलडोजर कार्रवाई की जांच की उठाई मांग

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(जावेद अंसारी) हरिद्वार। समाजवादी नेता मौसम अली ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 100 वर्ष से अधिक पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद के बुलडोजर से ध्वस्तीकरण के मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में महामहिम राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी हरिद्वार के माध्यम से एक ज्ञापन भेजा है।
ज्ञापन में मौसम अली ने कहा कि सहारनपुर में ऐतिहासिक मस्जिद को प्रशासन द्वारा बुलडोजर कार्रवाई के माध्यम से ध्वस्त किए जाने की घटना को लेकर स्थानीय नागरिकों एवं विभिन्न सामाजिक वर्गों में रोष है। उन्होंने आरोपों और उठ रहे सवालों का हवाला देते हुए कहा कि मस्जिद को रातों-रात ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई की गई और संबंधित पक्ष को अपनी बात रखने तथा कानूनी अधिकारों का प्रयोग करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात की जांच की मांग की कि कार्रवाई छुट्टी वाले दिन क्यों की गई और ध्वस्तीकरण से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
मौसम अली ने ज्ञापन में यह भी सवाल उठाया कि संबंधित पक्ष को न्यायालय का दरवाजा खटखटाने और उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि मामले में कोई कानूनी विवाद या प्रशासनिक आदेश था तो संबंधित पक्ष को कानून के अनुरूप उचित अवसर मिलना चाहिए था।
उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यह पता लगाया जाए कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किन परिस्थितियों में और किस प्रक्रिया के तहत की गई।
ज्ञापन में मस्जिद के ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सामाजिक महत्व की भी जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही, यदि जांच में किसी अधिकारी या व्यक्ति द्वारा कानून, नियमों अथवा न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की गई।
मौसम अली ने भविष्य में किसी भी धार्मिक अथवा ऐतिहासिक स्थल के संबंध में कार्रवाई से पहले पूरी कानूनी प्रक्रिया और न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित किए जाने की भी मांग की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति इस गंभीर एवं संवेदनशील मामले का संज्ञान लेकर उचित हस्तक्षेप करेंगी और संबंधित पक्ष को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।









