खनन पट्टा क्षेत्र में संबंधित विभाग की निगरानी पर उठे सवाल, हर 15 मिनट में सड़क पर दौड़ रहे खनन सामग्री से भरे डंपर: चर्चा
मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) गढ़ मीरपुर (हरिद्वार)। खनन पट्टों की अनुमति मिलने के बाद खनन क्षेत्र से निकलने वाले वाहनों की निगरानी और जांच को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि खनन पट्टा संचालित होने के दौरान भारी डंपर वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ जाती है, लेकिन इन डंपर वाहनों की फिटनेस, दस्तावेज और यातायात नियमों के पालन की जांच को लेकर संबंधित विभाग की सक्रियता दिखाई नहीं देती है। गढ़ मीरपुर की राऊ नदी क्षेत्र में वर्तमान में खनन पट्टा संचालित होने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों की चर्चा के अनुसार पट्टा निर्धारित स्थान से सुमन नगर मुख्य मार्ग पर लगभग हर 15 मिनट बाद रेत से भरे डंपर मार्ग पर आते-जाते दिखाई दे रहे हैं। इन खनन सामग्री रेत से भरे भारी डंपरो की आवाजाही से क्षेत्र में धूल-मिट्टी का गुबार और तेज रफ्तार के कारण राहगीरों एवं दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि खनन पट्टा क्षेत्र से लगातार भारी डंपरो के निकलने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा नियमित रूप से वाहनों की फिटनेस, परमिट, दस्तावेज और अन्य जरूरी मानकों की जांच क्यों नहीं की जा रही है? लोगों में चर्चा है कि सामान्य मार्गों पर तो विभागीय चेकिंग अभियान दिखाई देता हैं, लेकिन जिन क्षेत्रों में भारी वाहन मिट्टी से लदे डंपरो का दबाव सबसे अधिक रहता है, वहां निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्षेत्रीय चर्चा है कि खनन क्षेत्र में वाहनों की जांच केवल पट्टा शुरू होने से पहले या बाद में सीमित नहीं रहनी चाहिए। जब तक खनन कार्य और भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहती है, तब तक संबंधित विभागों को भी नियमित निगरानी और जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। चर्चा के अनुसार सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से गढ़ मीरपुर राऊ नदी क्षेत्र में विशेष चेकिंग अभियान चलाने तथा भारी डंपरो की जांच कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि लगातार उठ रहे इन सवालों पर संबंधित अधिकारी धरातल पर जांच और कार्रवाई करते हैं या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग की नींद खुलेगी।









