हरिद्वार

सलेमपुर-दादूपुर गोविंदपुर में ग्राम समाज की भूमि को लेकर चर्चाएं तेज, आखिर कब होगी जांच

सरकारी जमीनों पर कथित कब्जों, रजिस्ट्रियों और निरस्त पट्टों को लेकर उठ रहे सवाल

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। बहादराबाद क्षेत्र के सलेमपुर और दादूपुर गोविंदपुर गांवों में ग्राम समाज एवं अन्य सरकारी भूमि को लेकर इन दिनों चर्चाओं का बाजार गर्म बताया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर उठ रही चर्चाओं में भूमि के कथित हस्तांतरण, रजिस्ट्री में जमीन के विवरण, निरस्त पट्टों पर कब्जे तथा नाले, खत्ते और अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर निर्माण जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों, भूमि की पैमाइश और निष्पक्ष प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। चर्चाओं के अनुसार, कुछ स्थानों पर ऐसी जमीनों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जिन्हें स्थानीय लोग ग्राम समाज या सरकारी भूमि से जुड़ा हुआ बताते हैं। यह भी चर्चा है कि कुछ संपत्तियों के दस्तावेजों और मौके की स्थिति में अंतर हो सकता है। यदि ऐसा है, तो इसकी जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित भूमि का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है और वहां निर्माण या कब्जे की स्थिति वैध है अथवा नहीं।

*रजिस्ट्री और जमीन के रिकॉर्ड की जांच जरूरी*

क्षेत्र में चर्चाओं के माध्यम से यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि कहीं निजी भूमि की रजिस्ट्री के साथ किसी दूसरी भूमि का इस्तेमाल तो नहीं किया गया है। ऐसी चर्चाओं की सच्चाई जानने के लिए संबंधित रजिस्ट्री, खसरा-खतौनी, नक्शे, सीमांकन और अन्य राजस्व दस्तावेजों का मिलान आवश्यक है। केवल चर्चाओं या मौखिक दावों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन सार्वजनिक भूमि से संबंधित शिकायतों को नजरअंदाज करना भी जनहित में नहीं है।

स्थानीय चर्चाओं में पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी जनप्रतिनिधि या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के संबंध में कोई निष्कर्ष निकालने से पहले ठोस दस्तावेजी साक्ष्य और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि किसी भी स्तर पर सरकारी भूमि के दुरुपयोग, नियमों के उल्लंघन या मिलीभगत के प्रमाण मिलते हैं, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

एक ओर सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर सलेमपुर-दादूपुर गोविंदपुर की भूमि को लेकर उठ रहे सवालों पर भी संबंधित अधिकारियों का ध्यान जाना जरूरी है। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि यदि किसी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा या अनधिकृत निर्माण है, तो उसकी पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है। जनता को जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और संबंधित राजस्व अधिकारियों से अपेक्षा है कि वह शिकायतों एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराएं। जांच में ग्राम समाज की भूमि, नाले, खत्तों, निरस्त पट्टों और अन्य सरकारी संपत्तियों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए। जहां अनियमितता प्रमाणित हो, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई हो तथा वैध दस्तावेज रखने वाले लोगों के अधिकारों की भी रक्षा की जाए।

फिलहाल इस पूरे मामले में चर्चाएं अनेक हैं, लेकिन किसी भी आरोप को प्रमाणित तथ्य मानना उचित नहीं होगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संबंधित विभाग इन चर्चाओं और संभावित शिकायतों को गंभीरता से लेकर भूमि अभिलेखों की जांच करेगा। क्या सरकारी संपत्ति की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाएगी और यदि कोई अनियमितता मिलती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी? यह बड़े सवाल है। जनहित में निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ग्राम समाज की भूमि सार्वजनिक संपत्ति है, इसलिए उसकी सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग मामले का संज्ञान लेकर जांच की दिशा में क्या कदम उठाते हैं।

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