श्राद्ध पक्ष में कौवों और गायों को भोजन कराने से पितरों को मिलती है शांति: ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी

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(चिराग कुमार) हरिद्वार। श्राद्ध पक्ष के 16 दिनों में पितरों के निमित्त तर्पण के साथ कौवे और गाय को भोजन कराने की परंपरा है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार कौवे और गाय को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। घर में बनाए गए पकवान और भोजन का कुछ हिस्सा पितरों के निमित्त निकालकर पहले कौवे और गाय को खिलाने, ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान पुण्य की परंपरा भी है। धर्माचार्यों के अनुसार कौवों और गायों को भोजन कराने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ ही पंचबली निकालने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार पांचवली का अर्थ श्वान (कुत्ता), गाय, चींटी, कौवा और देवी देवताओं जैसे भगवान विष्णु और मां गंगा के लिए भोजन निकाला जाता है। उन्होंने बताया कि गाय में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है। यदि कोई पितृ अधोगति में भटक रहा है, तो मनुष्य रूप में जन्म लेने से पहले वो गाय के गर्भ में ही आता है। उसके बाद अपने कुल में उसका पुनः जन्म होता है। इसलिए श्राद्ध पक्ष में गायों को हरा चारा, रोटी, चोकर, गुड़ और नमक खिलाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार गाय को भोजन कराने से पितृ अधोगति से मुक्त हो जाते हैं और उन्हें शांति मिलती है। पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि कौवा एक अद्भुत पक्षी है, यह दोनों आयामों अर्थात पृथ्वी लोक और आकाश लोक में विचरण करता है। यदि हमारे कोई पितृ नभचर में भटक रहे हैं तो कौवों के माध्यम से वो भोजन उन पितरों को भी प्राप्त हो जाता है। श्राद्ध पक्ष मे अन्न दान करना भी शुभ माना जाता है।









