हरिद्वार

कांवड़ के रंग में रंगे डॉ. निशंक, ज्वालापुर में कावड़ियों की सेवा कर बढ़ाया उत्साह

चिराग कुमार हरिद्वार संवाददाता

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(चिराग कुमार) हरिद्वार। कावड़ मेले का आध्यात्मिक माहौल आज उस समय और गहरा हो गया जब उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक स्वयं भगवा वस्त्र धारण कर कावड़ के रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने न केवल कावड़ियों के लिए आयोजित भंडारे में भोजन परोसा, बल्कि कांवड़ उठाकर श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन भी किया। यह सेवा कार्यक्रम आज ज्वालापुर स्थित जटवाड़ा पुल पर कावड़ सेवा दल द्वारा आयोजित किया गया था। सुबह से ही यहां हजारों कावड़ियों की भीड़ उमड़ी हुई थी। इसी बीच डॉ. निशंक का आगमन होते ही पूरे क्षेत्र में जयकारों की गूंज सुनाई दी। भंडारे में पहुंचते ही डॉ. निशंक ने बिना किसी औपचारिकता के कतार में बैठे कावड़ियों को अपने हाथों से भोजन परोसा। पूड़ी, सब्जी और प्रसाद वितरित करते हुए उन्होंने हर श्रद्धालु से कुशलक्षेम पूछी। भोजन वितरण के बाद उन्होंने कावड़ियों से बातचीत कर प्रशासन और शासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं की जानकारी ली। कावड़ियों ने मार्ग में सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा और विश्राम स्थलों की व्यवस्था को लेकर संतोष व्यक्त किया और शासन-प्रशासन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। सेवा के बाद डॉ. निशंक ने स्वयं कांवड़ उठाई। गंगाजल से भरी कांवड़ को कंधे पर रखते ही वहां मौजूद कावड़ियों का जोश दोगुना हो गया। उन्होंने कहा कि कावड़ यात्रा केवल आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता का भी सबसे बड़ा उदाहरण है। डॉ. निशंक ने कहा देवभूमि उत्तराखंड की पहचान ही सेवा और श्रद्धा है। कावड़ मेले में आने वाला हर शिवभक्त हमारे लिए मेहमान है। प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाएं सराहनीय हैं, और हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना है कि हर कावड़िया सुरक्षित और सम्मान के साथ अपने गंतव्य तक पहुंचे। कावड़ सेवा दल के पदाधिकारियों संदीप शर्मा नितिन चौहान सोम चौहान आदि ने डॉ. निशंक के इस सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। समिति के सदस्यों का कहना था कि उनके द्वारा भोजन परोसने और कावड़ उठाने से न केवल श्रद्धालुओं का मनोबल बढ़ा, बल्कि आमजन को भी सेवा का प्रेरणा मिली। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, स्वयंसेवक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे क्षेत्र में “बोल बम” और “हर हर महादेव” के नारों से माहौल भक्तिमय हो गया। आज जटवाड़ा पुल का यह दृश्य इस बात का प्रमाण बना कि जनसेवा और आस्था जब एक साथ मिलती हैं, तो वह समाज के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन जाती हैं।

Related Articles

Back to top button