हरिद्वार

अंतरराष्ट्रीय ‘शक्ति मीमांसा’ संगोष्ठी में 51 शक्तिपीठों के प्रतिनिधियों के आमंत्रण, नेतृत्व एवं समन्वय के लिए डॉ श्वेता शर्मा को मिला विशेष सम्मान

राजेश पसरीचा देहरादून प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश पसरीचा) देहरादून। सनातन शोधकर्ता डॉ. श्वेता शर्मा को केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय महाराजा रणवीर परिसर जम्मू तथा श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में 21 से 24 जुलाई तक आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ‘शक्ति मीमांसा’ संगोष्ठी में देश-विदेश के 51 शक्तिपीठों के प्रतिनिधियों के आमंत्रण, नेतृत्व एवं समन्वय में उल्लेखनीय योगदान के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया।

इस संगोष्ठी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि श्री माता वैष्णो देवी धाम, कटरा में इस प्रकार की संगोष्ठी पहली बार आयोजित की गई, जिसमें देश-विदेश के 51 शक्तिपीठों के प्रतिनिधि पहली बार एक मंच पर एकत्रित हुए। इन सभी प्रतिनिधियों को संगोष्ठी में आमंत्रित करने तथा उनके मध्य समन्वय स्थापित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी डॉ. श्वेता शर्मा को दी गई जो कि बड़ी ही जिम्मेदारी के साथ निभाई गई। उनके अथक प्रयासों से विभिन्न राज्यों एवं अन्य देशों से आए प्रतिनिधियों के बीच संवाद और सहयोग को नई दिशा मिली।

संगोष्ठी का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं शतचंडी महायज्ञ के साथ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन जम्मू-कश्मीर के माननीय उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा द्वारा किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए विद्वानों, संतों, शोधकर्ताओं तथा श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

चार दिनों तक चले इस भव्य आयोजन में शक्तिपीठों की परंपरा, शाक्त दर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। डॉ. श्वेता शर्मा ने भी अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया तथा विभिन्न शक्तिपीठों के प्रतिनिधियों के मध्य संवाद और समन्वय की जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।

24 जुलाई को संगोष्ठी का समापन हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री कविंदर गुप्ता के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ. श्वेता शर्मा ने समस्त 51 शक्तिपीठों की ओर से माननीय राज्यपाल को स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका अभिनंदन किया। इसके उपरांत माननीय राज्यपाल की उपस्थिति में विभिन्न शक्तिपीठों के प्रतिनिधियों ने डॉ. श्वेता शर्मा के योगदान की सराहना करते हुए उनका सम्मान किया। नेपाल से पधारे डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें नेपाली टोपी भेंट की, जबकि श्रीलंका से आए श्री एन. एन. तिवाकरन ने श्रीलंका के शक्तिपीठ की ओर से स्मृति-चिह्न प्रदान किया। इसके अतिरिक्त विभिन्न शक्तिपीठों के प्रतिनिधियों ने शॉल एवं अपने-अपने प्रदेशों के पारंपरिक स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका सम्मान किया।

अपने संबोधन में माननीय राज्यपाल श्री कविंदर गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियाँ भारतीय ज्ञान परंपरा, शक्ति साधना तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने शक्तिपीठों के मध्य निरंतर संवाद, शोध और सहयोग को आगे बढ़ाने पर बल दिया।

यह आयोजन श्री माता वैष्णो देवी धाम, कटरा में शक्ति परंपरा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में स्थापित हुआ तथा देश-विदेश के शक्तिपीठों के मध्य भविष्य के सहयोग और समन्वय के लिए एक सशक्त आधार प्रदान कर गया।

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