हरिद्वार

मसूरी गोलीकांड: उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता: मोहम्मद आरिफ

मसूरी गोलीकांड की बरसी पर शहीद आंदोलनकारियों को मोहम्मद आरिफ ने किया नमन

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(नीटू कुमार) हरिद्वार। 2 सितंबर 1994 को उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर चल रहे जनांदोलन के दौरान हुआ मसूरी गोलीकांड उत्तराखंड के इतिहास का एक अत्यंत दुखद और भावनात्मक अध्याय है। इस गोलीकांड में राज्य आंदोलनकारियों ने अपने अधिकारों और अलग राज्य के सपने को साकार करने के लिए संघर्ष और बलिदान दिया। यह उक्त विचार राष्ट्रीय निगरानी समिति, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के पूर्व सदस्य मोहम्मद आरिफ ने मीडिया के समक्ष साझा किए हैं। मोहम्मद आरिफ ने मसूरी गोलीकांड की बरसी पर राज्य आंदोलन के सभी शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया और कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण आंदोलनकारियों के लंबे संघर्ष, त्याग और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि 2 सितंबर 1994 का दिन उत्तराखंड आंदोलन के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। पृथक राज्य की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे आंदोलनकारियों ने जिस साहस और दृढ़ संकल्प के साथ संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। मोहम्मद आरिफ ने कहा कि आज उत्तराखंड एक अलग राज्य के रूप में विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन हमें उन वीर आंदोलनकारियों और शहीदों के बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए, जिनके संघर्ष की बदौलत उत्तराखंड राज्य का सपना साकार हुआ है। उन्होंने कहा कि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम उनके सपनों के अनुरूप एक मजबूत, समृद्ध, विकसित और न्यायपूर्ण उत्तराखंड के निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। अंत में मोहम्मद आरिफ ने मसूरी गोलीकांड के सभी शहीद आंदोलनकारियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उत्तराखंड की धरती अपने वीर सपूतों के संघर्ष और बलिदान को सदैव याद रखेगी।

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