हरिद्वार

बोले डीएम मयूर दीक्षित—बच्चों का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी

स्कूली बच्चों से मिले जिलाधिकारी-जाना हाल

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। जनपद हरिद्वार में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बुधवार को राजकीय प्राथमिक विद्यालय संख्या-3, ज्वालापुर तथा राजकीय प्राथमिक विद्यालय संख्या-18, कनखल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था, मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) की गुणवत्ता, स्वच्छता तथा छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। जिलाधिकारी स्वयं कक्षाओं में पहुंचे और छात्र-छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने बच्चों से पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रम से संबंधित प्रश्न पूछकर उनकी शैक्षणिक प्रगति की जानकारी ली। साथ ही बच्चों से मिड-डे मील की गुणवत्ता, भोजन की नियमितता तथा विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री प्राथमिकता है कि जनपद के प्रत्येक शिक्षण संस्थान में छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। इसी उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा विद्यालयों का लगातार औचक निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि शिक्षा, मध्याह्न भोजन, स्वच्छता एवं अन्य सभी मूलभूत सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सभी शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी है। शिक्षकों को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करना चाहिए।

मिड-डे मील में गुणवत्ता से समझौता नहीं
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों को उपलब्ध कराए जाने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी अथवा लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने भोजन में हरी सब्जियों को शामिल करने तथा बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुरूप स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने विद्यालय परिसर, कक्षाओं, शौचालयों तथा पेयजल व्यवस्था की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों एवं शिक्षकों को दिए।

334 छात्र-छात्राओं में से 204 मिले उपस्थित
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं एवं कार्यरत शिक्षकों की संख्या के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। प्रधानाध्यापक श्रीमती सरिता रानी चौधरी ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि विद्यालय में कुल 334 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिनमें निरीक्षण के दिन 204 छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। विद्यालय में कुल 12 शिक्षक कार्यरत हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एक शिक्षक प्रमुद अहमद 04 फरवरी 2025 से विद्यालय से अनुपस्थित चल रहे हैं। जिलाधिकारी ने इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई एवं विद्यालय की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अभिभावकों से नियमित संवाद के निर्देश
जिलाधिकारी ने शिक्षकों को समय-समय पर छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा, नियमित उपस्थिति और शैक्षणिक प्रगति में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय से बच्चों के सर्वांगीण विकास को गति मिलेगी तथा शिक्षा के स्तर में भी सकारात्मक सुधार होगा।

सीएसआर के माध्यम से सुधरेगा पुराने विद्यालयों का ढांचा
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि निरीक्षण के दौरान जिन विद्यालयों में कमियां चिन्हित की जा रही हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र दूर कराया जाएगा। पुराने विद्यालय भवनों के मरम्मत एवं रखरखाव कार्यों को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से कराने की कार्ययोजना भी बनाई जाएगी, जिससे विद्यालयों का आधारभूत ढांचा और अधिक मजबूत एवं सुविधाजनक बनाया जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के सभी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए नियमित निरीक्षण एवं प्रभावी निगरानी की व्यवस्था लगातार जारी रहेगी। निरीक्षण के दौरान संबंधित शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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