50 साल से काबिज किसान की पुश्तैनी जमीन पर कब्जे करने व चकबंदी विभाग पर फर्जीवाड़े का गंभीर आरोप
मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। जनपद के भगवानपुर तहसील क्षेत्र में चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। ग्राम लालवाला मजबता निवासी किसान ऋषिपाल पुत्र हरिया ने चकबंदी विभाग के अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाया है। आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीन को कथित रूप से जाली व फर्जी वसीयत के आधार पर दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया गया है। पीड़ित ने रोशनाबाद में आयोजित तहसील दिवस के दौरान अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है। शिकायत के अनुसार, संबंधित भूमि वर्ष 1967 में उनकी दादी द्वारा विरासत के आधार पर राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराई थी और परिवार पिछले लगभग 50 वर्षों से उस पर काबिज चला आ रहा है। आरोप है कि चकबंदी अधिकारी ने अभिलेखों में कथित रूप से हेराफेरी करते हुए उक्त भूमि सुरेंद्र पुत्र मनफूल निवासी ग्राम सालापुर, जिला सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) के नाम दर्ज कर दी। इसके बाद सुरेंद्र ने भूमि का विक्रय प्रेमवती पत्नी बीर सिंह निवासी ग्राम शांतशाह को विक्रय कर दि, जबकि प्रेमवती ने आगे चलकर वही भूमि चम्पा पत्नी शिवलाल रेंजर निवासी बस्ती गांव, जिला रुद्रप्रयाग के नाम बेच दी। ऋषिपाल का कहना है कि उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी तब हुई जब भूमि के बैनामे की जानकारी सामने आई। उनका आरोप है कि वर्तमान खरीदार चम्पा और उसका पति शिवलाल रेंजर पुलिस के बल पर जबरन उनकी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं तथा निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब उन्होंने कब्जे का विरोध किया तो मेरे साथ गाली-गलौज और मारपीट की। आरोप है कि एक व्यक्ति ने अपनी लाइसेंसी बंदूक दिखाकर जान से मारने की धमकी दी, जबकि अन्य लोगों ने भी पूरे परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। इतना ही नहीं, आरोपियों द्वारा खेत में खड़ी मक्के की फसल भी नष्ट कर दी गई। पीड़ित किसान ने प्रशासन से उक्त भूमि के फर्जीवाड़े की निष्पक्ष व जाली वसीयत के आधार पर हुए नामांतरण की जांच की मांग की है। तथा उनकी पुश्तैनी भूमि को कब्जा मुक्त कराकर उन्हें वापस दिलाया जाए। साथ ही, पूरे प्रकरण में दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई है। फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है। संबंधित पक्षों के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। प्रशासन द्वारा जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।









