हरिद्वार

अखाड़ों में उत्साह, सरकार पर भरोसा, आध्यात्मिक विरासत के महापर्व को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी तेज

मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागमों में शुमार हरिद्वार कुंभ मेला 2027 को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप प्रदान करने के लिए उत्तराखंड सरकार युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है, बल्कि अखाड़ों, संतों और धार्मिक संगठनों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उनकी अपेक्षाओं एवं सुझावों के अनुरूप व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में लगी है। यही कारण है कि संत समाज में आगामी कुंभ को लेकर विशेष उत्साह और सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है। संतों का मानना है कि राज्य सरकार की गंभीरता, प्रतिबद्धता और समयबद्ध तैयारियां इस बार के कुंभ को ऐतिहासिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। कुंभ मेला 2027 राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं समय-समय पर संतों, अखाड़ों और धार्मिक संगठनों से संवाद कर तैयारियों का फीडबैक ले रहे हैं। सरकार ने शंकराचार्यों को औपचारिक आमंत्रण भेजने के साथ-साथ अखाड़ा परिषद और प्रमुख संतों से भी नियमित संपर्क बनाए रखा है। संत समाज से प्राप्त सुझावों को योजनाओं में शामिल कर व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी और श्रद्धालु-हितैषी बनाया जा रहा है। कुंभ क्षेत्र में इन दिनों स्थायी आधारभूत ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सड़कें, पेयजल व्यवस्था, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छता, पार्किंग और यातायात प्रबंधन से जुड़े अनेक कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। साथ ही अस्थायी व्यवस्थाओं को भी चरणबद्ध तरीके से समय पर पूरा करने की कार्ययोजना पर प्रभावी अमल किया जा रहा है।
मेला प्रशासन भी संत समाज के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है। मेलाधिकारी सोनिका के नेतृत्व में अधिकारी विभिन्न अखाड़ों और संत-महात्माओं से मुलाकात कर उनकी आवश्यकताओं और सुझावों को समझ रहे हैं। इसी क्रम में अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती और अन्य अधिकारियों ने महानिर्वाणी अखाड़ा, पंचायती अखाड़ा निरंजनी, जूना अखाड़ा तथा अन्य प्रमुख धार्मिक संस्थाओं के संतों से भेंट कर कुंभ की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की। संतों को साधु-संतों के शिविरों, आधारभूत सुविधाओं और प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी दी गई। साथ ही आयोजन को सफल बनाने के लिए उनके मार्गदर्शन और सहयोग का आग्रह भी किया गया। संतों ने भी विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर अपने सुझाव साझा किए और श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने पर विशेष बल दिया। भेंटवार्ताओं के दौरान संत समाज ने एक स्वर में कहा कि हरिद्वार कुंभ 2027 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक समरसता का विराट उत्सव होगा। संतों ने राज्य सरकार की पहल की सराहना करते हुए कहा कि तैयारियों में दिखाई दे रही गंभीरता और संत समाज के साथ संवाद की परंपरा आयोजन की सफलता का मजबूत आधार बनेगी। संतों का कहना है कि सभी अखाड़े और धार्मिक संगठन आगामी कुंभ को लेकर अत्यंत उत्साहित हैं और इस पावन अवसर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार, मेला प्रशासन और संत समाज के सामूहिक प्रयासों से हरिद्वार कुंभ 2027 दिव्यता, भव्यता और सुव्यवस्था के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। संत समाज ने मेला प्रशासन को पूर्ण सहयोग का भरोसा देते हुए कहा कि सभी अखाड़े आपसी समन्वय और सामंजस्य के साथ इस महाआयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उनका मानना है कि कुंभ केवल श्रद्धा का पर्व नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। ऐसे में हरिद्वार कुंभ 2027 को ऐतिहासिक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

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