एक प्रयास नशे के विरुद्ध: नशा छोड़िए, जीवन चुनिए-स्वस्थ युवा ही सशक्त भारत की पहचान: शिवानी गौर
"नशा किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि अनेक नई समस्याओं की शुरुआत"

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(लेखिका) हरिद्वार। भारत विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है। यही युवा शक्ति हमारे राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी है। किंतु जब यही शक्ति नशे की गिरफ्त में आने लगती है, तो उसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार, समाज और देश के भविष्य पर भी पड़ता है। इसलिए नशे के विरुद्ध संघर्ष केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का आंदोलन है।
आज नशे के अनेक रूप हमारे सामने हैं शराब, तंबाकू, गुटखा, सिगरेट, ई-सिगरेट और विभिन्न मादक पदार्थ। इनके सेवन से हृदय, फेफड़े, यकृत और मस्तिष्क पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। साथ ही मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाइयाँ, पारिवारिक कलह, सड़क दुर्घटनाएँ और अपराध जैसी समस्याएँ भी बढ़ती हैं। नशा व्यक्ति की निर्णय क्षमता को कमजोर कर देता है और उसे धीरे-धीरे आत्मविश्वास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व से दूर कर देता है।
युवा वर्ग विशेष रूप से इस चुनौती का सामना कर रहा है। कई बार साथियों का दबाव, तनाव, जिज्ञासा या दिखावे की प्रवृत्ति उन्हें नशे की ओर आकर्षित करती है। शुरुआत भले ही शौक या प्रयोग के रूप में हो, लेकिन समय के साथ वही आदत निर्भरता में बदल सकती है। इसलिए जागरूकता और सही मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है।
नशे की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम परिवार, विद्यालय और समाज हैं। माता-पिता यदि बच्चों से खुलकर संवाद करें, शिक्षक जीवन-मूल्यों पर आधारित शिक्षा दें और समाज सकारात्मक वातावरण बनाए, तो नशे की ओर बढ़ते कदमों को रोका जा सकता है। खेल, योग, साहित्य, संगीत, कला और सामाजिक सेवा जैसी गतिविधियाँ युवाओं को रचनात्मक दिशा प्रदान करती हैं।
साथ ही यह भी आवश्यक है कि नशे की लत से जूझ रहे लोगों को केवल दोषी न माना जाए। उन्हें उचित उपचार, परामर्श और परिवार का सहयोग मिलना चाहिए, ताकि वे सम्मानपूर्वक सामान्य जीवन में लौट सकें। नशामुक्ति केवल चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक सहयोग और मानवीय संवेदना का भी विषय है।
एक स्वस्थ, शिक्षित और जागरूक समाज ही विकसित राष्ट्र की आधारशिला होता है। आइए, हम सभी यह संकल्प लें कि स्वयं नशे से दूर रहेंगे, दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों से अवगत कराएँगे और नशामुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनेंगे। यही हमारे युवा, समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की सच्ची नींव होगी।









