हरिद्वार

बेटी को न्याय दिलाने के लिए वर्षों तक लड़ा पिता-अब सरकार से सवाल, क्या बेटियां सच में सुरक्षित हैं?

मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए वर्षों तक संघर्ष करने वाले पीड़ित पिता डॉ. राकेश बंसल ने सरकार की कार्यप्रणाली और बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। डॉ. राकेश बंसल ने बताया कि उनकी बेटी स्वर्गीय वंशिका बंसल की 3 मार्च 2022 को सिद्धार्थ फार्मेसी कॉलेज के गेट के बाहर खुलेआम अभियुक्त आदित्य तोमर ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। बेटी की हत्या के बाद परिवार को उम्मीद थी कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उन्हें हरसंभव सहयोग मिलेगा, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया। उन्होंने बताया कि अभियुक्त आदित्य तोमर को नैनीताल हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद परिवार ने हार नहीं मानी। न्याय की उम्मीद में उन्होंने स्वयं सुप्रीम कोर्ट में मामले की पैरवी की और लगातार संघर्ष जारी रखा। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और अभियुक्त आदित्य तोमर को उम्रकैद की सजा हुई। डॉ. बंसल का कहना है कि बेटी की हत्या के बाद न्याय के लिए परिवार ने जिस पीड़ा और संघर्ष का सामना किया, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उनका दुख इस बात को लेकर भी है कि इतने बड़े संकट और लंबे संघर्ष के बावजूद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से पीड़ित परिवार की सुध लेने या उनसे मिलने की पहल नहीं हुई। उन्होंने कहा सरकार मंचों से कहती है कि बहन-बेटियां सुरक्षित हैं। मेरा सवाल है कि अगर एक बेटी की खुलेआम गोली मारकर हत्या हो जाए और उसके परिवार को न्याय के लिए वर्षों तक स्वयं संघर्ष करना पड़े, तो बेटियों की सुरक्षा के इन दावों का क्या अर्थ रह जाता है पीड़ित पिता ने सरकार से सवाल किया कि ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा, उन्होंने कहा कि अपराध के बाद केवल आरोपी को सजा दिलाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवार को न्याय की पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक, कानूनी और मानवीय सहयोग मिलना भी जरूरी है। डॉ. राकेश बंसल ने सरकार से मांग की है कि पीड़ित परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी अन्य परिवार को अपनी बेटी के लिए न्याय पाने के लिए वर्षों तक अकेले संघर्ष न करना पड़े।

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