देहरादून

आयुष विभाग और शासन की चुप्पी पर भड़के चिकित्साधिकारी, दूसरे दिन भी 500 से अधिक अधिकारी धरने पर डटे

राजेश पसरीचा देहरादून प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश पसरीचा) देहरादून। राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ, उत्तराखण्ड द्वारा अपनी सात सूत्रीय मांगों के समर्थन में आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवा निदेशालय, देहरादून में संचालित अनिश्चितकालीन पूर्ण कार्य बहिष्कार एवं धरना-प्रदर्शन दूसरे दिन भी पूरे उत्साह एवं मजबूती के साथ जारी रहा। आंदोलन के दूसरे दिन प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पहुंचे 500 से अधिक आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी धरना स्थल पर उपस्थित रहे तथा अपनी मांगों के समर्थन में अभूतपूर्व एकजुटता का प्रदर्शन किया।

धरना स्थल पर उपस्थित चिकित्साधिकारियों में आयुष विभाग के उच्च अधिकारियों एवं शासन की उदासीनता को लेकर गहरा आक्रोश देखने को मिला। आंदोलन प्रारंभ होने के दो दिन बाद भी न तो विभागीय उच्च अधिकारियों द्वारा आंदोलनरत चिकित्साधिकारियों की समस्याओं का संज्ञान लिया गया और न ही शासन स्तर से कोई सार्थक पहल अथवा सकारात्मक वार्ता की गई। चिकित्साधिकारियों का कहना है कि वर्षों से लंबित संवर्गीय प्रकरणों एवं जायज मांगों की लगातार उपेक्षा की जा रही है, जिससे पूरे संवर्ग में असंतोष व्याप्त है।

आंदोलन को विभिन्न सहयोगी संगठनों का व्यापक समर्थन प्राप्त हो रहा है। उत्तराखण्ड फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष एवं प्रांतीय महासचिव द्वारा संघ की मांगों के समर्थन में सहमति पत्र प्रदान किया गया। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सहायकों ने भी अपना समर्थन पत्र सौंपते हुए चिकित्साधिकारी संवर्ग की मांगों को न्यायोचित बताया। इसके अतिरिक्त पंचकर्म सहायक संगठन के प्रांतीय संगठन द्वारा भी आंदोलन को नैतिक समर्थन प्रदान किया गया, जिससे आंदोलन को और अधिक मजबूती मिली है।

धरना सभा को संबोधित करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. नीरज कोहली एवं प्रांतीय महासचिव डॉ. हरदेव सिंह रावत ने कहा कि चिकित्साधिकारी संवर्ग अपनी सात सूत्रीय मांगों के समाधान हेतु लंबे समय से शासन एवं विभाग का ध्यान आकर्षित करता रहा है, किंतु आज तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक सात सूत्रीय मांगों पर यथोचित कार्यवाही किए जाने का लिखित आश्वासन शासन द्वारा नहीं दिया जाता, तब तक यह धरना एवं पूर्ण कार्य बहिष्कार अनवरत रूप से जारी रहेगा।

उन्होंने सभी चिकित्साधिकारियों से आंदोलन को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि शासन एवं विभाग द्वारा शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आंदोलन को आगामी दिनों में और अधिक व्यापक एवं शक्तिशाली स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल चिकित्साधिकारियों के हितों का नहीं, बल्कि आयुष विभाग की गरिमा, सेवा संरचना के सुदृढ़ीकरण तथा जनहित में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थापना का संघर्ष है।

सभा में उपस्थित चिकित्साधिकारियों ने एक स्वर में आंदोलन को पूर्ण समर्थन देते हुए मांगों के समाधान तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। संघ ने शासन एवं विभागीय अधिकारियों से पुनः मांग की है कि वे अपनी चुप्पी तोड़ते हुए आंदोलनरत चिकित्साधिकारियों की समस्याओं का तत्काल संज्ञान लें तथा सात सूत्रीय मांगों के समाधान हेतु प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करें।

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