हरिद्वार

आत्म-देखभाल के साथ दूसरों के प्रति संवेदनशीलता भी-विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर विशेष: शिवानी गौर

शिवानी गौर लेखिका हरिद्वार

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवानी गौर) लेखिका। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस हमें केवल अपने मानसिक स्वास्थ्य की चिंता करने का संदेश नहीं देता, बल्कि यह आत्ममंथन करने का अवसर भी देता है कि कहीं हमारा अपना व्यवहार किसी दूसरे व्यक्ति के मानसिक सुकून को तो प्रभावित नहीं कर रहा। हम अक्सर अपने तनाव, अपनी परेशानियों और अपनी भावनाओं को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि हमारे शब्द, हमारा लहजा, हमारी उपेक्षा और हमारा व्यवहार किसी दूसरे के मन पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं।

कभी किसी की भावनाओं को बार-बार नज़रअंदाज़ करना, किसी का अपमान करना, उसकी तुलना दूसरों से करना, उसे कमतर महसूस कराना या उसकी परेशानी को मज़ाक में उड़ा देना उसके आत्मविश्वास और मानसिक शांति को चोट पहुँचा सकता है। घर हो, विद्यालय हो, कार्यस्थल हो या कोई व्यक्तिगत रिश्ता-हर जगह हमारे व्यवहार की संवेदनशीलता महत्त्वपूर्ण है।

इसलिए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने का अर्थ केवल यह नहीं कि हम अपने मन की देखभाल करें, बल्कि यह भी है कि हम अपने व्यवहार की समीक्षा करें। हमें स्वयं से पूछना चाहिए-क्या हमारे शब्द किसी को अनावश्यक पीड़ा पहुँचा रहे हैं? क्या हम दूसरों को अपनी बात कहने का अवसर देते हैं क्या हम असहमति के बावजूद सम्मान बनाए रखते हैं।

जिस प्रकार हम अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए सम्मान, सहयोग और समझ की अपेक्षा करते हैं, उसी प्रकार दूसरों को भी इनकी आवश्यकता होती है। हम हर व्यक्ति की समस्या का समाधान नहीं कर सकते, लेकिन अपने व्यवहार से उसकी परेशानी बढ़ाने से बच सकते हैं। कभी-कभी किसी को ध्यान से सुन लेना, कठोर शब्दों के स्थान पर विनम्रता चुनना और बिना निर्णय सुनाए उसकी भावनाओं को समझना भी बहुत बड़ा भावनात्मक सहयोग होता है।

अंततः मानसिक स्वास्थ्य दिवस का वास्तविक संदेश यही होना चाहिए कि हम स्वयं के प्रति भी संवेदनशील बनें और दूसरों के प्रति भी। क्योंकि स्वस्थ मन केवल व्यक्तिगत प्रयासों से नहीं, बल्कि ऐसे सामाजिक वातावरण से भी विकसित होता है जहाँ सम्मान हो, संवाद हो और भावनाओं के लिए स्थान हो।

आइए, इस दिन केवल अपने मन को स्वस्थ रखने का संकल्प न लें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि हमारा व्यवहार किसी दूसरे के मन को अनावश्यक रूप से आहत न करे। मानसिक स्वास्थ्य की शुरुआत स्वयं से होती है, लेकिन उसका सकारात्मक प्रभाव हमारे आसपास के लोगों तक पहुँचता है। मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल केवल स्वयं को टूटने से बचाना नहीं, बल्कि अपने व्यवहार से दूसरों को टूटने से बचाने की संवेदनशीलता भी है।

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