जूना अखाडे के संतों ने किया ब्रह्मलीन संतों, गुरूओं एवं सिद्ध महात्माओं का तर्पण व पूजन
नीटू कुमार हरिद्वार संवाददाता

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(नीटू कुमार) हरिद्वार। सर्वपितृ अमावस्या पर श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के संतों ने अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक एवं अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरी महाराज के नेतृत्व में भैरव घाट पर ब्रह्मलीन संतों, गुरूओं एवं सिद्ध महात्माओं का विधि-विधान से तर्पण एवं पूजन किया और उत्तराखंड की सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना की। पितृ अमावस्या का महत्व बताते हुए श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि सर्वपितृ अमावस्या केवल पितरों का स्मरण नहीं, बल्कि हमारी संन्यास परंपरा के उन ब्रह्मलीन महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन तप, त्याग, साधना, धर्मरक्षा और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित किया। गुरु मूर्तियों का स्मरण करना ही सनातन की आत्मा है। सिद्धपीठ श्री दूधेश्वरनाथ मठ के पीठाधीश्वर एवं जूना अखाड़ा के वरिष्ठ सभापति श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज, अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड भारत की आध्यात्मिक आत्मा है। यहां का विकास पूरे राष्ट्र की समृद्धि से जुड़ा है। हिमालय पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर वीरेंद्र आनंद गिरि महाराज ने कहा कि गंगा तट पर किया गया यह तर्पण सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक है। गुरु परंपरा के आशीर्वाद से ही धर्म और मानवता का कल्याण संभव है। इस अवसर पर श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज, श्रीमहंत महेश पुरी महाराज, श्रीमहंत कंचन गिरि महाराज, श्रीमहंत शिवम सरस्वती महाराज, श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि महाराज, पुजारी भास्कर पुरी, पुजारी दिवाकर पुरी, दीपक गिरि महाराज सहित जूना अखाड़ा के थानापति और संत महंत मौजूद रहे।









