खसरा संख्या 502 बनी चर्चाओं का केंद्र, ग्राम समाज की भूमि पर टेढ़ी नज़र
आखिरकार क्यों खड़े होते हैं रखवाले की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न: चर्चा

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। हरिद्वार जनपद की ग्राम पंचायत कटारपुर अलीपुर में ग्राम समाज की लगभग सैकड़ों बीघा कीमती भूमि को लेकर बड़ा खेल चर्चाओं की सुर्खियां बटोर रहा है। क्षेत्रीय ग्रामीणों में चर्चा है कि खसरा संख्या 502 में दर्ज ग्राम समाज की भूमि पर कथित रूप से “हवाई चक” काटने का खेल खेला जा रहा है, जबकि क्षेत्र में कभी चकबंदी लागू ही नहीं हुई है जो चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पूरे प्रकरण को लेकर ग्रामीणों में चर्चा है कि ग्राम समाज की भूमि को कब्जाने के लिए यह एक सुनियोजित षड्यंत्र हैं। ग्रामीणों की चर्चा के अनुसार, उक्त भूमि का बड़ा हिस्सा ग्राम समाज की संपत्ति है, जबकि पूर्व में राज्य सरकार ने इसी खसरा संख्या में लगभग 35 गरीब और भूमिहीन किसानों को पट्टे आवंटित किए थे। जो अभी निरस्त हैं। जिनमें वर्षों से छोटे किसान खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। ग्रामीणों में चर्चा है कि कुछ सफेद नकाबपोश नेता और प्रभावशाली जनप्रतिनिधि व कथित भू-माफिया ग्राम पंचायत की खाली पड़ी बेशकीमती भूमि तथा निरस्त हो चुके पट्टों की भूमि को बड़े निवेशकों और उद्योगपतियों के हवाले करने की तैयारी में जुटे हैं जो ऐसी चर्चा सुनने को मिल रही है। और उक्त भूमि पर धीरे-धीरे अवैध रुप से कब्जा करने की फिराक में है। यहां तक उद्योगपतियों ने कार्य भी शुरू कर दिया है। चर्चा है कि उक्त भमि के अभिलेखों में हेरफेर और कथित “हवाई चक” के माध्यम से भूमि की वास्तविक स्थिति बदलने की कोशिश की जा रही है। इससे गांव में भारी नाराजगी है और पंचायत क्षेत्र में इस मामले को लेकर तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। वहीं जनपद में ग्राम समाज की भूमि पर लगातार बढ़ते अतिक्रमण और कब्जों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कि आखिरकार भू-माफिया सुनियोजित षड्यंत्रकारी योजना तैयार कर सरकारी और ग्राम समाज की भूमि पर इस तरह कब्जा जमा लेते हैं, जबकि अधिकारी विभागीय कर्मचारियों का गांव दहातों में आने-जाने का ताता लगा रहता है। और जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बने रहते हैं। हालांकि चर्चाओं के केंद्र में सरकारी और ग्राम पंचायत भूमि को अवैध रूप से कब्जवाने में कुछ भ्रष्ट राजस्व कर्मियों के श्रेय की भूमिका भी अधिकतर सामने आती रही है। वही ग्राम पंचायत कटारपुर अलीपुर के ग्रामीणों में उक्त भूमि को लेकर चर्चा है कि शिकायतें होने के बावजूद जांच और कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। फरियादें पटवारियों और राजस्व कर्मचारियों तक पहुंचती हैं, लेकिन कार्रवाई फाइलों में सिमट कर रह जाती है। जिस कारण करोड़ों रुपये मूल्य की ग्राम समाज की भूमि धीरे-धीरे निजी हाथों में पहुंचती नज़र आ रही है। चर्चा है कि उत्तराखंड धामी सरकार समय-समय पर सरकारी भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी करती रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इन आदेशों से मेल नहीं खाती है। और जैसे ही शासन के आदेश स्थानीय स्तर तक पहुंचते हैं, उनका प्रभाव समाप्त हो जाता है और सरकारी भूमि पर कब्जों का खेल बादस्तूर चलता रहता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर शिकायतों और लगातार उठ रहे आरोपों व चर्चाओं के बावजूद तहसील प्रशासन उक्त भूमि प्रकरण में अनजान क्यों बना हुआ है। क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की परतें छिपी हुई हैं। क्षेत्र की जनता मांग कर रही है कि खसरा संख्या 502 की भूमि की निष्पक्ष जांच कराई जाए, राजस्व अभिलेखों का सत्यापन कराया जाए, यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी की जाए। फिलहाल कटारपुर अलीपुर क्षेत्र में ग्राम समाज की भूमि को लेकर उठ रही चर्चाओं ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी भूमि की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।









