चंद पैसों के लालच में ” गेम प्लान,” आशा और प्राइवेट अस्पताल का गठजोड़, नवजात की मौत, जच्चा की हालत बनी नाजुक: चर्चा
मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। ज्वालापुर क्षेत्र के निजी अस्पताल और एक आशा कार्यकर्ता की कथित मिलीभगत को लेकर गंभीर चर्चा सामने आ रही हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि चंद पैसों के लालच में गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल के बजाय एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां डिलीवरी के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई। इसके बाद महिला की तबीयत भी बिगड़ गई और उसका ऑपरेशन करना पड़ा। चर्चा है कि ऑपरेशन के बाद भी महिला की हालत गंभीर बनी रही। और जच्चा महिला की गंभीर हालत को देखते हुए निजी अस्पताल प्रबंधन ने गरीब परिवार को यह कहकर अन्य अस्पताल में रेफर कराया कि वहां बेहतर उपचार संभव होगा और खर्चे की व्यवस्था भी निजी अस्पताल प्रबंधन के द्वारा कराई जाएगी। साथ ही बेबस परिवार को कुछ पैसे भी निजी प्रबंधन द्वारा दिए गए। चर्चा है कि टूटे, बेबस गरीब परिवार ने अपने हालातों से समझौता करते हुए निजी अस्पताल प्रबंधन की बात मान ली और जच्चा महिला को अन्य अस्पताल में भर्ती कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण का क्षेत्र में चर्चा का विषय तब बना, जब निजी अस्पताल प्रबंधन अपने खर्च देने के आश्वासन से पीछे हट गया। चर्चा है कि गरीब परिवार निजी अस्पताल में पहुंचा और वहां हंगामा खड़ा कर दिया। जिससे निजी अस्पताल प्रबंधन के हाथ पैर फूल गए। और निजी अस्पताल प्रबंधन ने एक बार फिर अपने कारनामे पर पर्दा डालने के लिए परिवार को इसी तरह समझाया और उन्हें खर्चे का आश्वासन देकर मामले को रफा दफा कर दिया गया। यह चर्चा भी है कि इस निजी अस्पताल में इससे पहले कई केस बिगड़ चके हैं। गर्भवती महिलाओं के साथ जान के खिलवाड़ हो चुके हैं। प्रशासनिक कार्रवाई का चाबुक भी चल चुका है लेकिन निजी अस्पताल प्रबंधन में कोई सुधार नहीं आया है। जो चर्चाओं का विषय बना हुए हैं। क्षेत्र में चर्चा यह भी है कि कुछ आशा कार्यकर्ता कथित कमीशन के लालच में गरीब और जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों में भर्ती कराती हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं और नवजातों की जान जोखिम में पड़ जाती है। आपको बता दे कि हरिद्वार की गूंज हिंदी समाचार पत्र इस घटना की पूरी छानबीन में जुटा है। और जल्द ही निजी अस्पताल व आशा कार्यकर्ता के नाम का पर्दाफाश भी किया जाएगा। जिससे नवजात शिशुओं व गर्भवती महिलाओं के साथ जान का खिलवाड़ न हो सकें और ऐसे अस्पतालों पर प्रशासनिक कार्रवाई का हेंटर चल सके।









