उत्तराखंड की राजधानी देहरादून प्रेमनगर क्षेत्र टोंस नदी पर बना पुल चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट
16 करोड़ रुपए की लागत से बना पुल चंद दिनों में हुआ गड्ढे में तब्दील आखिर कौन जिम्मेदार

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश पसरीचा) देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में पिछले काफी समय से लगातार भ्रष्टाचार बढ़ता दिखाई दे रहा है। सरकारी विभागों से लेकर नेता जनप्रतिधि सिर्फ अपनी ईमानदारी और जिम्मेदारी की बड़ी बड़ी बातें कर आम जनता को लूटने में लगे हुए हैं। जहां डबल इंजन वाली सरकार के मुख्यमंत्री से लेकर तमाम नेता मंत्री बड़े बड़े राजनीतिक मंचों से भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड बनाए जाने के दावे करते हुए देखे जाते हैं तो वहीं बढ़ते भ्रष्टाचार की खबरें आना अब आम बात हो गई है। जहां आए दिन किसी न किसी बड़े भ्रष्टाचार के मामले से प्रदेश सरकार की भी खूब किरकिरी हो रही है। वहीं प्रदेश की राजधानी देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र टोंस नदी के पुल का कुछ हिस्सा चंद दिनों में ही ढह गया। गनीमत की बात यह रही कि किसी तरह से कोई दुर्घटना नहीं हुई। बताया जा रहा है कि पुल का निर्माण कुछ समय पहले ही किया गया है। वहीं पुल के निर्माण में 16 करोड़ रुपए खर्च कर आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था। लेकिन नव निर्मित पुल चंद दिनों में ही इस कदर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा यह चर्चा का विषय बना हुआ है वहीं अचानक से पुल का कुछ हिस्सा ढह जाने से इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पुल निर्माण में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। यदि निर्माण कार्य की बारीकी से जांच की जाए तो सच्चाई सामने आएगी। जबकि सरकारी सड़कों व विशेष रूप से पुल निर्माण कार्य अनुभवी इंजीनियर की देख रेख में किए जाते हैं। जिसमें मानकों के साथ ही कार्य की गुणवत्ता और मजबूती का पूरा ध्यान रखना अति महत्वपूर्ण रहता है। उसके बावजूद चंद दिनों में सरकारी बजट से होने वाले निर्माण कार्य में इतनी बड़ी लापरवाही कहीं न कहीं आम जनता की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ होता दिखाई दे रहा है। जहां सरकारी विभागों में तैनात आम कर्मियों से मामूली सी लापरवाही बरतने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है तो वहीं करोड़ों रुपए से सरकारी निर्माण कार्य होने पर इतनी बड़ी लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती क्या सरकारी खजाने से किए जाने वाले करोड़ों रुपए के निर्माण कार्यों में मिलीभगत का खेल तो नहीं होता। फिलहाल उत्तराखंड में सरकारी बजट से होने वाले निर्माण कार्यों की बारीकी से निरीक्षण कर गुणवत्ता की जाँच होनी चाहिए। जिससे भविष्य में इस तरह से बड़ी लापरवाही नहीं हो पाएगी।









