साबिर पाक के उर्स की अव्यवस्था से श्रद्धालुओं में रोष, लंगर की दुकानों और पार्किंग के बीच का मार्ग बना मुसीबत
मोहम्मद आरिफ/जावेद अंसारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ/जावेद अंसारी) कलियर। हजरत साबिर पाक के उर्स में देशभर से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंच रहे हैं, लेकिन उर्स प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्था को लेकर श्रद्धालु संतुष्ट नहीं है। उर्स स्थल पर लंगर की दुकानों एवं मोटरसाइकिल पार्किंग और श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए एक ही मार्ग का इस्तेमाल होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उर्स के दौरान एक ओर मोटरसाइकिल पार्किंग बनी हुई है, जबकि दूसरी ओर लंगर तैयार करने वाली कई दुकानें एक ही कतार में संचालित हो रही हैं। इन दुकानों के बीच से होकर गुजरने वाले मार्ग पर दिनभर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। लंगर तैयार होने के बाद जब उसका वितरण शुरू होता है तो बड़ी संख्या में लोग लंगर लेने के लिए एकत्र हो जाते हैं। ऐसे में मार्ग पर भीड़ बढ़ने से मार्ग संकरा हो जाता है जिस कारण इस मार्ग पर जाम जैसी स्थिति पैदा हो रही है। वहीं इसी मार्ग से उर्स में आने वाले लोग अपने दोपहिया वाहन पार्किंग तक पहुंचाने का प्रयास भी करते हैं। क्योंकि पार्किंग का मुख्य मार्ग भी इसी रास्ते पर है। लंगर लेने वाले जायरीनों की भीड़ और मोटरसाइकिलों की आवाजाही एक ही स्थान पर होने के कारण लोगों को अपने वाहन पार्क करने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके अलावा इसी दिशा में बने रैन बसेरे का रास्ता भी है। ऐसे में लंगर बनने और वितरण के समय इस मार्ग पर भीड़ और बढ़ जाती है। इससे रैन बसेरे तक पहुंचने वाले लोगों के साथ-साथ मोटरसाइकिल पार्किंग का इस्तेमाल करने वाले श्रद्धालु भी परेशान हो रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि उर्स जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसलिए पार्किंग, लंगर और पैदल आवाजाही के लिए अलग-अलग व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। यदि पार्किंग का प्रवेश और निकास मार्ग दूसरी ओर कर दिया जाए तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो सकता है। वहीं लंगर की दुकानों को भी ऐसे स्थान पर व्यवस्थित किया जाना चाहिए, जहां उनके कारण मुख्य आवागमन बाधित न हो। उर्स में आने वाले श्रद्धालुओं ने उर्स प्रशासन से मांग की है कि मौके का निरीक्षण कर यातायात और पैदल आवाजाही की व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को उर्स के दौरान किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े और धार्मिक आयोजन सुचारु रूप से संपन्न हो सके।









